अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: सुप्रीम कोर्ट में जमा हुई SIT की रिपोर्ट, अब क्या होगा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर चढ़ावा और दान चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जमा कर दी है. यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दी गई है और अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा. इस मामले में पुलिस की जांच तेजी से चल रही है और कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी: सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट, सीलबंद लिफाफे में खुलेगा राज?
UP सरकार ने कोर्ट में दाखिल की SIT की स्टेटस रिपोर्ट
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 20, 2026 at 1:53 PM IST
लखनऊ: राम मंदिर चढ़ावा और दान चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जमा कर दी है. सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम यानी एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में दी है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा.
UP सरकार की सीलबंद रिपोर्ट में क्या है?: चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस की जांच भी तेजी से चल रही है और मुख्य आरोपी टिन्नू यादव सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. प्रारंभिक पूछताछ के बाद कुछ लोग जेल भी भेजे जा चुके हैं. इस मामले में नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भर्ती को लेकर प्रक्रिया तेजी से चल रही है. हजारों की संख्या में लोगों ने इस पद के लिए आवेदन किया है. दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर सुनवाई कर रहा है. जांच जारी होने की वजह से रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है.
जांच जारी है इसलिए रिपोर्ट अभी सार्वजनिक न की जाए. उसी रिपोर्ट पर सुनवाई होगी. कोर्ट तय करेगा कि जांच इसी तरह चलेगी या CBI से कराई जाएगी.- तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल
क्यों जमा की गई रिपोर्ट?: 13 जुलाई को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने SIT से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी. साथ ही केंद्र, यूपी सरकार और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया. याचिकाकर्ताओं ने CCTV फुटेज और DVR सुरक्षित रखने की भी मांग की, क्योंकि उनका कहना था सबूत नष्ट हो सकते हैं.
गबन का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास बंद की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया, और इसी स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के हवाले किया गया है.
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