होमवकीलइलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस के राजस्व अभिलेखों के आदेश पर रोक लगाई
वकील

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस के राजस्व अभिलेखों के आदेश पर रोक लगाई

महाराजगंज के नौतनवा एसडीएम द्वारा बिना नोटिस के जारी किए गए आदेश, जिसमें एक महिला के राजस्व अभिलेखों में सुधार का प्रावधान था, को कोर्ट ने अस्थायी रूप से रोका। याचिकाकर्ता सुमित्रा देवी ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 38(1) के तहत इस आदेश को चुनौती दी, और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की एकल पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस देकर चार सप्ताह में जवाब मांगा। अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

13 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिना नोटिस के राजस्व अभिलेखों के आदेश पर रोक लगाई

सौजन्य से:- Jagran

बिना नोटिस दिए पारित आदेश पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लगाई रोक, महाराजगंज SDM के आदेश पर रोक

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महाराजगंज के नौतनवा एसडीएम द्वारा बिना नोटिस दिए पारित एक आदेश पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

HighLights

- बिना नोटिस दिए महिला के खिलाफ राजस्व अभिलेखों में सुधार से जुड़ा मामला

- याचिकाकर्ता सुमित्रा देवी ने एसडीएम के पारित आदेश को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महाराजगंज जिले के नौतनवा स्थित उप जिलाधिकारी (एसडीएम) द्वारा पारित उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें बिना नोटिस दिए एक महिला के खिलाफ राजस्व अभिलेखों में सुधार से जुड़ा फैसला सुनाया गया था। याचिकाकर्ता सुमित्रा देवी ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 38(1) के तहत पारित आदेश को चुनौती दी थी।

याचिका के अनुसार यह आदेश तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर, प्रतिवादी संख्या-5 के आवेदन पर पारित किया गया था, लेकिन याचिकाकर्ता को न तो कोई नोटिस भेजा गया और न ही उसे सुनवाई का कोई अवसर दिया गया।

राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि यह आदेश अपीलीय है, इसलिए याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। लेकिन याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि जब सुनवाई का अवसर ही नहीं दिया गया, तो वैकल्पिक उपचार याचिका पर सुनवाई में बाधा नहीं बन सकता।

न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के व्हर्लपूल कार्पोरेशन लिमिटेड बनाम रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेडमार्क्स मुंबई (1998) मामले में प्रतिपादित सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि मामले की प्रकृति और संक्षिप्त तर्कों को देखते हुए इसे नए सिरे से सुनना उचित होगा, बशर्ते प्रतिवादियों को भी सुनवाई का अवसर दिया जाए।

कोर्ट ने विपक्षी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को नए सिरे से होगी। उप जिलाधिकारी नौतनवा द्वारा 15 दिसंबर 2025 को पारित मूल आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अतुल कुमार पांडेय ने पैरवी की।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
जस्टिस एस चंद्रशेखर को देवघर में अधिवक्ता संघ ने सम्मानित, बाबा बैद्यनाथ का मोमेंटो व वस्त्र भेंट
वकील

जस्टिस एस चंद्रशेखर को देवघर में अधिवक्ता संघ ने सम्मानित, बाबा बैद्यनाथ का मोमेंटो व वस्त्र भेंट

राज्यपाल ने शपथ दी, वी. कामेश्वर राव ने संभाली पटना हाईकोर्ट की कमान
वकील

राज्यपाल ने शपथ दी, वी. कामेश्वर राव ने संभाली पटना हाईकोर्ट की कमान

हापुड़ में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 2.9 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण, 5.1 करोड़ का सेटलमेंट
वकील

हापुड़ में राष्ट्रीय लोक अदालत ने 2.9 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण, 5.1 करोड़ का सेटलमेंट

चंडीगढ़ की वकील की जीत: हाई कोर्ट ने टैक्स धारा 147A रद्द कर 700 नोटिस बंद किए
वकील

चंडीगढ़ की वकील की जीत: हाई कोर्ट ने टैक्स धारा 147A रद्द कर 700 नोटिस बंद किए

मुंगेर में 26 साल के विवाद का मिनटों में निपटान, 1829 केसों की सुलह, 8.47 करोड़ का समझौता
वकील

मुंगेर में 26 साल के विवाद का मिनटों में निपटान, 1829 केसों की सुलह, 8.47 करोड़ का समझौता

लोक अदालत में 1976 विवादों का आपसी समाधान, 647 कर्जदारों का 1.78 करोड़ ऋण निपटाया
वकील

लोक अदालत में 1976 विवादों का आपसी समाधान, 647 कर्जदारों का 1.78 करोड़ ऋण निपटाया

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को संशोधित राज्य मेधा सूची पेश करने व सामुदायिक स्वास्थ्य स्नातकों को 4200 ग्रेड पे के साथ नियुक्त करने का निर्देश दिया
वकील

झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC को संशोधित राज्य मेधा सूची पेश करने व सामुदायिक स्वास्थ्य स्नातकों को 4200 ग्रेड पे के साथ नियुक्त करने का निर्देश दिया

बुलंदशहर बार में महिला वकीलों को 30% आरक्षण, हाईकोर्ट ने बायलॉज संशोधन का निर्देश
वकील

बुलंदशहर बार में महिला वकीलों को 30% आरक्षण, हाईकोर्ट ने बायलॉज संशोधन का निर्देश

ताज़ा ख़बरें