सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता की घटना पर एससीबीए की कड़ी प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत में एक वादी के कथित अभद्र व्यवहार की निंदा की और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भ्रामक क्लिप हटाने के लिए केंद्र से कार्रवाई की मांग की। एससीबीए ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की गरिमा और न्याय व्यवस्था की पवित्रता के लिए गंभीर चुनौती हैं।

सौजन्य से:- Amar Ujala
'न्यायपालिका की गरिमा से समझौता अस्वीकार्य': सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता पर भड़का SCBA, सरकार से क्या मांग की?
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत में एक वादी के कथित अभद्र व्यवहार की कड़ी निंदा की। एससीबीए ने कोर्टरूम की रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाने और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भ्रामक क्लिप हटाने के लिए केंद्र से कार्रवाई की मांग की।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को न्यायिक कार्यवाही के दौरान हुई एक अभूतपूर्व घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसोसिएशन ने अदालत के समक्ष एक वादी की ओर से किए गए कथित अपमानजनक और अभद्र व्यवहार की निंदा की। एसोसिएशन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की गरिमा और न्याय व्यवस्था की पवित्रता के लिए गंभीर चुनौती हैं।
एससीबीए ने क्या कहा?
एससीबीए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एक पक्षकार का व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य था। अदालत की कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार की गाली-गलौज, धमकी या व्यवधान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और कानून के शासन पर सीधा प्रहार है।
न्यायालय की गरिमा का सम्मान करें
बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायालय की गरिमा और सम्मान हर परिस्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए। अदालत के भीतर अनुशासन और मर्यादा लोकतांत्रिक न्याय प्रणाली की आधारशिला है, इसलिए इस प्रकार के आचरण से कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना आवश्यक है।
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एससीबीए ने क्या मांग की?
इस घटना के बाद एससीबीए ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, क्लिपिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर प्रसार को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) तैयार करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान समय में अदालत की कार्यवाही के वीडियो या उनके संपादित अंश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित किए जाते हैं, जिससे कई बार तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है और न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है।
बार एसोसिएशन ने रिकॉर्डिंग को लेकर क्या कहा?
बार एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे कोर्टरूम की रिकॉर्डिंग का दुरुपयोग रोका जा सके और न्यायिक संस्थानों की गरिमा सुरक्षित रहे। एससीबीए के अनुसार, अदालत की कार्यवाही को संदर्भ से हटाकर प्रसारित करने से आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और न्यायपालिका में लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
सरकार से क्या मांग की?
एससीबीए ने केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि कानून के अनुरूप ऐसे वीडियो और एडिट किए गए क्लिप, जिनका उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाना या अदालतों के प्रति जनता का विश्वास कमजोर करना हो, उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएं।
बार एसोसिएशन ने अंत में दोहराया कि न्यायालय की कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखना सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है और न्यायपालिका के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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