हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार को फटकारा, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच वित्तीय लाभ देने में भेदभाव नहीं कर सकती
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने समान पात्रता वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच वित्तीय लाभ देने में भेदभाव को अनुचित ठहराया है. अदालत ने याचिकाकर्ता को एसीपी योजना का लाभ देने के निर्देश दिए हैं और राज्य सरकार के आदेश को भी रद्द कर दिया है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
एक समान पात्रता वाले कर्मचारियों के बीच वित्तीय लाभ देने में भेदभाव नहीं कर सकती सरकार: हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने समान पात्रता वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देने में भेदभाव मामले में राज्य सरकार की दलीलें की अस्वीकार.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : July 11, 2026 at 6:36 AM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों से जुड़े एक मामले में समान पात्रता वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच वित्तीय लाभ देने में भेदभाव को अनुचित ठहराया है. हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर धनी राम वर्मा की याचिका पर सुनवाई की. अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रतिवादी राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) योजना का लाभ दिया जाए. साथ ही अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार के 6 सितंबर 2022 के आदेश को भी रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को 9 साल की सेवा पूरी होने पर देय एसीपी योजना के सभी लाभ दिए जाएं. हालांकि, वास्तविक वित्तीय लाभ फैसले की तिथि से ही देय होंगे.
अदालत के सामने वादी-प्रतिवादी ने रखी ये दलीलें
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनके साथ सेवानिवृत्त हुए असिस्टेंट इंजीनियर प्रेम सिंह चौधरी को साल 2018 में विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना ही 4-9-14 टाइम स्केल का लाभ दिया गया, जबकि उनकी मांग केवल इस आधार पर अस्वीकार कर दी गई कि उन्होंने विभागीय परीक्षा पास नहीं की थी. वहीं, इस मामले में राज्य सरकार ने दलील दी कि साल 2020 में वित्त विभाग द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार उच्च वेतनमान और एसीपी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा ?
हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता साल 2011 में ही रिटायर हो चुके थे, इसलिए साल 2020 में जारी स्पष्टीकरण उनके मामले पर लागू नहीं किया जा सकता. साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार समान रूप से पात्र दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच वित्तीय लाभ देने में भेदभाव नहीं कर सकती. इसी आधार पर अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें एसीपी योजना का लाभ देने के निर्देश दिए.
क्या है पूरा मामला ?
मामले में याचिकाकर्ता धनी राम वर्मा की नियुक्ति साल 1973 में जूनियर इंजीनियर के रूप में हुई थी. दिसंबर 2001 में उन्हें नियमित असिस्टेंट इंजीनियर बनाया गया और 30 अप्रैल 2011 को वे रिटायर हुए. सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने एसीपी योजना का लाभ मांगा, लेकिन विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण न होने का हवाला देकर उनकी मांग अस्वीकार कर दी गई, जबकि उनके साथ सेवानिवृत्त हुए प्रेम सिंह चौधरी को बिना विभागीय परीक्षा के ही 4-9-14 टाइम स्केल का लाभ मिल चुका था. इसी आदेश को चुनौती देते हुए धनी राम वर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट में हंगामा, शख्स ने गाली दीं और पेपर्स फेंके

कानून अब तोड़फोड़ और बाधा पहुंचाने वालों को सख्त रूप से मुश्किल में डालेगा

वन अधिकार कानून: ग्रामीणों ने जल्द निष्पादन की मांगी मांग की, असंतोष बढ़ता जा रहा है

चाचा की संपत्ति पर भतीजी के पति का हक: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

हाई कोर्ट सख्त, लुधियाना अदालत की फाइल में गायब हुआ अहम दस्तावेज, 3 माह में जांच की तय करने के आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: खामेनेई के पोस्टर हटाने से रोकने की मांग वाली याचिका खारिज

सीएम के दौरे से पहले भाजपा नेता का हाउस अरेस्ट, कानून-व्यवस्था के नाम पर उठे सवाल

उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को दिया अल्टिमेटम
ताज़ा ख़बरें
- उत्तर प्रदेश में 900 नए न्यायालयों के निर्माण पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
- ताजमहल में जलाभिषेक के वाद में नया मोड़, अब अगली सुनवाई 12 अगस्त को
- न्यायिक देरी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: घोंघा भी उठा सकता है सवाल
- एम्स कार्यवाहक प्रमुख को फटकारा: माफी के बाद शांत हुए
- हैश मान एक इलेक्ट्रॉनिक फ़िंगरप्रिंट है; धारा 63(4) बीएसए प्रमाणपत्र की आवश्यकता वैध है: सुप्रीम कोर्ट
- सुप्रीम कोर्ट नाराज है दीवानी मामलों की धीमी सुनवाई पर
- चम्बा: अदालत ने खारिज की अधिक मुआवजा की मांग
- भवाली अध्यक्ष नरेश पांडे विरोधी यौन शोषण मामले में युवती को मिली जमानत

