उपभोक्ता अदालत ने दिया डंडा, हॉलिडे कंपनी को ₹1.50 लाख लौटाने का आदेश
दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने हॉलिडे कंपनी को 'अनुचित व्यापार व्यवहार' का दोषी पाया और कंपनी को ग्राहक के 1.50 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
हॉलिडे पैकेज के नाम पर झांसा देने वालों पर उपभोक्ता अदालत का डंडा, कंपनी को ₹1.50 लाख लौटाने का आदेश
दिल्ली जिला उपभोक्ता आयोग ने छुट्टियों और लग्जरी सुविधाओं के झूठे वादे कर ग्राहकों को महंगी मेंबरशिप बेचने वाली एक हॉलिडे कंपनी को 'अनुचित व्यापार व्यवहार' का दोषी पाया है।
अदालत ने कंपनी को दिया आदेश
उपभोक्ता अदालत ने कंपनी को ग्राहक के 1.50 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। प्रेजिडेंट दिव्या ज्योति जयपुरियार और सदस्य हरप्रीत कौर चर्या के फोरम ने कहा कि कंपनी ने मेंबरशिप बेचने के दौरान ऐसे वादे किए, जिन्हें पूरा करने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। शिकायतकर्ता ने 1.50 लाख रुपये देकर M/s कंट्री हॉलिडेज इन एंड सूट्स प्राइवेट लिमिटेड से हॉलिडे मेंबरशिप खरीदी थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने की टिप्पणी
कंपनी ने कई आकर्षक सुविधाओं का वादा किया था, जिनमें एयर टिकट वाउचर भी शामिल थे। लेकिन सुनवाई के दौरान कंपनी यह साबित नहीं कर पाई कि उसने ये वाउचर वास्तव में ग्राहक को दिए थे। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(47) के तहत किसी उपहार, इनाम या विशेष सुविधा का लालच देकर ग्राहक को आकर्षित करना और बाद में उसे न देना गलत कारोबारी तरीकों (अनुचित व्यापार व्यवहार) की श्रेणी में आता है।कोर्ट ने 29 जून को सुनाया फैसला
ऐसे वादों का मकसद केवल ग्राहकों को सौदा करने के लिए लुभाना होता है। इसी साल 29 जून को सुनाए गए फैसले में आयोग ने कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट पर भी कड़ी टिप्पणी की। फैसले में कहा गया कि कंपनी ने 'मेंबरशिप चार्ज', 'मेंबरशिप वैल्यू' और 'वेकेशन चार्ज' जैसे शब्दों का अलग-अलग जगह इस्तेमाल किया, लेकिन इनके मतलब स्पष्ट नहीं किए।एकतरफा कॉन्ट्रैक्ट में नहीं बांध सकती कंपनी
25 हजार रुपये अलग से कमिशन ने यह भी पाया कि पूरा मेंबरशिप एग्रीमेंट कंपनी के पक्ष में झुका हुआ था। ग्राहक के पास शतों पर बातचीत करने या उन्हें बदलवाने की लगभग कोई गुंजाइश नहीं थी। आयोग ने कहा कि 4 और 5 स्टार प्रॉपर्टी में छुट्टियां, कम मेटिनेस फीस और अन्य आकर्षक सुविधाओं के नाम पर ग्राहको को इस तरह के एकतरफा कॉन्ट्रैक्ट में नहीं बांधा जा सकता। कोर्ट ने कंपनी को दिया आदेश
आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 1.50 लाख रुपये 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 25 हजार रुपये अलग से देने होंगे। वादों का जाल, अब जवाबदेही का सवाल हॉलिडे पैकेज और लाइफटाइम मेंबरशिप के नाम पर बड़े-बड़े वादे करना आज कई कंपनियों की आम मार्केटिंग रणनीति बन चुकी है। क्या संदेश देता है कोर्ट का फैसला
आकर्षक ऑफर, मुफ्त एयर टिकट, लग्जरी होटल और भारी छूट का लालच देकर ग्राहकों से मोटी रकम वसूल ली जाती है, लेकिन बाद में शर्तों और जटिल कॉन्ट्रैक्ट का हवाला देकर वादों से मुकरने की शिकायतें भी बढ़ रही है। उपभोक्ता अदालत का यह फैसला साफ संदेश देता है कि एकतरफा एग्रीमेंट और भ्रामक विज्ञापनों के सहारे ग्राहको के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।कन्वर्सेशन शुरू करें
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