सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को चार्जशीट के दस्तावेज देखने का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि किसी भी आरोपी को चार्जशीट के दस्तावेज देखने से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा है कि अगर इन दस्तावेजों को छिपाया गया, तो यह आरोपित के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर गंभीर आघात होगा।

सौजन्य से:- Jagran
'आरोपित से नहीं छिपा सकते चार्जशीट के दस्तावेज', रॉ के पूर्व अधिकारी वी.के. सिंह की याचिका पर SC ने सुनाया फैसला
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी आरोपित को चार्जशीट (आरोप पत्र) में शामिल दस्तावेजों को देखने या प्राप्त करने से वंचित नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर इन दस्तावेजों को छिपाया गया, तो यह आरोपित के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर गंभीर आघात होगा, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीने के अधिकार का ही एक हिस्सा है।
यह आदेश जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल और रॉ के पूर्व अधिकारी वी.के. सिंह की याचिका पर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सिंह के खिलाफ साल 2007 में उनकी किताब 'इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलिजेंस – सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' में गोपनीय जानकारी उजागर करने के लिए ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
राष्ट्रीय सुरक्षा और मौलिक अधिकार में संतुलन सीबीआइ ने इन दस्तावेजों को 'अत्यधिक संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा' बताते हुए सिंह को देने का विरोध किया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि ये दस्तावेज चार्जशीट का हिस्सा हैं और आरोपित के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए इन्हें रोका नहीं जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक के मौलिक अधिकार के बीच एक भावपूर्ण संतुलन बनाया। कोर्ट ने सीबीआइ के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया कि सिंह को इन अत्यधिक गोपनीय दस्तावेजों की केवल टाइप्ड कॉपी दी जाए।
अदालती शर्तों के साथ मिली राहत सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस पुराने आदेश को पलट दिया, जिसमें सिंह को केवल दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वी.के. सिंह को दो महीने के भीतर ये कॉपियां सौंपी जाएं।
हालांकि, देश की संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने यह कड़ी शर्त भी लगाई है कि सिंह इन दस्तावेजों को किसी भी इलेक्ट्रानिक, प्रिंट या इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक नहीं करेंगे। इसके लिए उन्हें ट्रायल कोर्ट में एक महीने के भीतर हलफनामा भी देना होगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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