होमवकीलसुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही की रोक लगाई
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही की रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर अदालती कार्यवाही का वीडियो प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है. जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट 24/7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती है.

24 जुलाई 2026 को 09:14 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही की रोक लगाई

सौजन्य से:- ndtv.in

- सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग के कुछ हिस्सों को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर रोक लगाई है

- शीर्ष अदालत ने न्यायपालिका की छवि खराब करने वाले क्लिप के प्रसारण को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है

- जस्टिस बागची ने डिजिटल मीडिया में डेटा नियमन की चुनौती बताते हुए लाइव स्ट्रीमिंग पर नियंत्रण की बात कही

अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और उसके वीडियो प्रसारित किए जाने पर रोक की मांग वाली याचिका शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची. कोर्ट ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के चुनिंदा हिस्सों को दिखाकर न्यायपालिका की छवि खराब करने पर नाराजगी जताई. शीर्ष अदालत ने सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालती कार्यवाही का कोई भी क्लिप प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है.

इस दौरान वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें लाइवस्ट्रीमिंग से कोई समस्या नहीं दिखती. हालांकि उन्होंने जस्टिस केवी विश्वनाथन की अदालत की कार्यवाही के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का जिक्र करते हुए कहा कि यह मजाक बन गया है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अब इससे हर किसी को चीजें पढ़ने और देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

वहीं जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल स्पेस में डेटा के नियमन को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि अदालत की कार्यवाही तक सीमित पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि लाइवस्ट्रीमिंग पर नियंत्रण होना चाहिए और जो पक्ष कार्यवाही देखना चाहता है, उसे इसके लिए स्पष्ट अनुरोध करना चाहिए. इस तरह उनका आशय यह था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग पब्लिक प्लेटफॉर्म पर नहीं होनी चाहिए, यदि कोई पार्टी इसकी फीड चाहती है तो उसकी मांग पर ही इसे मुहैया कराया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: हमें गलतियां दोहराने का ट्रेंड तोड़ना होगा, सुप्रीम कोर्ट करेगा निगरानी, NEET- UG पर बड़ा कदम

जस्टिस बागची ने कहा- एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकती अदालत

अकसर लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान जजों की ओर से होने वाली कोई टिप्पणी या चर्चा पर भी खबरें बन जाती हैं. ऐसे में अदालत का फैसला अहम है. जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि कोर्ट 24/7 एंटरटेनमेंट चैनल नहीं बन सकता. फिलहाल इस मामले की अदालत में सुनवाई जारी है. अदालती कार्यवाही की क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित करने पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सर्वसम्मति से लिया है. इस मामले में केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है.

यह भी पढ़ें: मैंने ऐसा नहीं कहा था... 'वक्त बर्बाद न करें' वाले बयान पर बोले चीफ जस्टिस

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ के 6 पदों के गायन पर दंड के प्रश्न को जांचने का आश्वासन दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के वेतन कटौती व अवमानना आदेश पर रोक लगाई, हिमाचल के बागवानी सचिव को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने वैध कारणों से ‘वन्दे मातरम्’ न गाने पर दंड की जाँच को स्वीकृत किया, पर गीत के पदों की संख्या का फैसला संसद के अधिकार में रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की ऊँची कीमतों को ‘डकैती’ कहा, दवाओं पर मूल्य नियंत्रण की मांग

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश
वकील

दिल्ली के 33 लाख मतदाताओं को SIR नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण व फ़िल्टरिंग का निर्देश

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश
वकील

लोक अदालत ने फरीदाबाद में सड़क दुर्घटना के मुआवजा क्लेम का निपटारा; बीमा कंपनी को 2.5 लाख रुपये देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली SIR नोटिसों को ‘मशीन‑जनित’ कहा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया
वकील

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वोटर लिस्ट रिव्यू में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी’ नोटिस को यांत्रिक बताया

ताज़ा ख़बरें