30 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने बस ब्लास्ट के दोषी की सजा रद्द की, फिर होगा ट्रायल
राजस्थान हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2019 का फैसला रद्द कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह मामला विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में जाएगा, जहाँ पूरे मामले पर दोबारा सुनवाई होगी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के समलेटी बस विस्फोट मामले में डॉ. अब्दुल हमीद की दोषसिद्धि और फांसी की सजा रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि उन्हें उचित कानूनी सहायता नहीं मिली और मामले में नए सिरे से विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई होगी
नई दिल्ली: 1996 के चर्चित समलेटी बस विस्फोट के दोषी ठहराए गए डॉ. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा और दोषसिद्धि सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। कोर्ट ने घटना के 30 साल बाद अब राजस्थान हाई कोर्ट से कहा, उनके खिलाफ दोबारा से ट्रायल हो और स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएं। स्पेशल कोर्ट स्वतंत्र रूप से साक्ष्यों का मूल्यांकन करेगी। आगरा से बीकानेर जा रही एक बस में समलेटी गांव के पास IED विस्फोट में 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 37 घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें डॉ. हमीद की दोषसिद्धि और मृत्युदंड बरकरार रखा गया था।
SC ने राजस्थान हाईकोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द कर दिया
IED विस्फोट में 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 37 घायल हुए थे
मुकदमे के दौरान उचित कानूनी सहायता नहीं मिली, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के चर्चित समलेटी बस विस्फोट मामले में दोषी ठहराए गए डॉ. अब्दुल हमीद की फांसी की सजा और दोषसिद्धि रद्द कर दी है। अदालत ने कहा कि मुकदमे के दौरान उन्हें उचित कानूनी सहायता नहीं मिली, जिससे निष्पक्ष सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट का 2019 का फैसला भी रद्द कर दिया।
1996 में बस में हुआ था IED विस्फोट
यह मामला 1996 का है, जब आगरा से बीकानेर जा रही एक बस में राजस्थान के समलेटी गांव के पास IED विस्फोट हुआ था। इस धमाके में 14 लोगों की मौत हो गई थी और 37 अन्य घायल हुए थे। सुप्रीम कोर्ट ने अब राजस्थान हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाए, जो सभी साक्ष्यों का नए सिरे से स्वतंत्र मूल्यांकन कर दोबारा ट्रायल करेगी।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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