सीजीपी संसद चलो मार्च पर दिल्ली हाईकोर्ट में मासूम लड़कियों के साथ छेड़छाड़ के विवादित आरोप
दिल्ली हाईकोर्ट में सेजीपी संसद चलो मार्च पर पुलिस की कार्रवाई के मामले में एक विवादित आरोप लगाया गया कि पुलिस ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की। अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।

सौजन्य से:- Hindustan
मीलॉर्ड! CJP मार्च में लड़कियों से छेड़छाड़ हुई, प्राइवेट पार्ट में...; अदालत में क्या कहा गया
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सीजेपी के प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया। महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए गए।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई और सोनम वांगुचक को जंतर-मंतर से हटाए जाने से जुड़ीं कुछ जनहित याचिकाओं पर बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने कठोरता से कार्रवाई की। सुनवाई के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों संग छेड़खानी का आरोप भी लगाया गया। यहां तक कहा कि उनके प्राइवेट पार्ट पर लाठी लगाए गए। वहीं, सरकार की ओर से आरोपों का खंडन करते हुए पुलिसकर्मियों पर हमले की बात कही। अदालत ने केंद्र सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी। अदालत ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने वरिष्ठ वकील एन हरिहरण, विकास सिंह और गोपाल शंकरानरायणन ने याचिकाकर्ताओं की ओर से दलीलें रखीं। हरिहरण ने कहा कि जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण था। वे संविधान में मिले अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन पुलिस ने बर्बरता पूर्वक उन पर कार्रवाई की। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कहा कि 20 जुलाई को संसद मार्च की अपील की गई थी और इसके लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस जुटान पर हमला किया गया। लड़के-लड़कियां जुटे थे। ऐसी कोई बात नहीं है कि वे हिंसक हो गए थे। कई वीडियो हैं जिनमें सिविल कपड़ों में पुलिस के साथ बैठे लोग प्रदर्शनकारियों पर हमले कर रहे हैं।
पुलिसकर्मियों पर छेड़छाड़ के लगाए गए आरोप
हरिहरण ने कहा, 'मीलॉर्ड ऐसे बहुत से वीडियो हैं जिन्हें आप देखेंगे। लाठियों में कीलें लगीं थीं और इनसे बच्चों को पीटा गया। पैलेट और इलेक्ट्रिक लाठियों का इस्तेमाल किया गया। क्या इस तरह से शांतिपूर्ण विरोध से निपटा जाता है?' वकीलों ने अदालत से वीडियो देखने की अपील की। हरिहरण ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, 'प्रदर्शन में शामिल छात्राओं से छेड़छाड़ की गई। इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं कि एक बार वीडियो देखिए। कम से कम जो पुलिसकर्मी पहचाने जा रहे हैं उनके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। मैं नहीं कह रहा हूं कि जिन लोगों ने पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाईं उन्हें जाने दिया जाए। कम से कम 90 छात्र जख्मी हुए हैं।'
हरिहरण ने एसआईटी की मांग करते हुए कहा, 'हम नहीं चाहते कि दिल्ली पुलिस इसकी जांच करे। किसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए। हमने जो सामग्री दी है उनमें पुलिसकर्मी साफ पहचाने जा सकते हैं। पुलिसकर्मी छेड़छाड़ करते दिख रहे हैं, उनके प्राइवेट पार्ट में लाठी डाल रहे हैं। यह बहुत भयानक है।' उन्होंने अदालत से न्यायिक जांच की मांग की।
केंद्र सरकार ने क्या जवाब दिया
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि ऐसे वीडियो मौजूद हैं जिनमें पुलिसकर्मी घायल दिख रहे हैं। यह सभी जानते हैं कि इस तरह के कथित शांतिपूर्ण प्रदर्शन में ऐसे मौके आते हैं जब दूसरे लोग इन्हें हाईजैक कर लेते हैं। शांतिपूर्ण आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं रह जाते। पुलिस के वाहनों को क्षति पहुंचाई गई। पुलिसकर्मी जख्मी हुए। जहां भीड़ ने कानून तोड़ा वहां एफआईआर दर्ज की जा रही है। हिंसा हुई तो पुलिस को कार्रवाई करनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे वीडियो हैं जिनमें भीड़ हिंसक होते हुए और पथराव करते हुए दिख रही है।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा, ‘मिस्टर राजू, 2-3 सवाल हैं। क्या यह इक्का-दुक्का मामले हैं? नहीं, दूसरा- यदि यह गैर कानूनी जमावड़ा था, जैसा कि आपने कहा तो इससे कैसे निपटना है, इसको लेकर कानून है। रामलीला मैदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश है। यदि जनहित याचिका में ये मुद्दे उठाए गए तो आप कैसे कह सकते हैं कि सभी को एफआईआर करानी चाहिए। यदि एक दो मामले होते तो बात अलग थी।’ अदालत ने दो याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए चार सप्ताह का समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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