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पुलिस जांच में निर्दोष घोषित होने के बावजूद आरोपी को अदालत तलब कर सकती है

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता को दर्शाते हैं, तो उसे अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब किया जा सकता है, भले ही पहले पुलिस जांच में वह निर्दोष घोषित किया गया हो।

12 जुलाई 2026 को 03:13 am बजे
पुलिस जांच में निर्दोष घोषित होने के बावजूद आरोपी को अदालत तलब कर सकती है

सौजन्य से:- Jagran

'जांच में निर्दोष मिलने के बाद भी ट्रायल कोर्ट आरोपी को कर सकती है तलब', पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का अहम फैसला

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस जांच में निर्दोष पाए जाने के बावजूद ट्रायल कोर्ट आरोपी को तलब कर सकती है। ...और पढ़ें

HighLights

- पुलिस जांच में निर्दोष पाए जाने पर भी तलब हो सकता आरोपी

- ट्रायल कोर्ट की शक्तियां पुलिस जांच से समाप्त नहीं होतीं

- महेंद्रगढ़ हत्या मामले में हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस जांच में किसी व्यक्ति को निर्दोष पाए जाने से ट्रायल कोर्ट की शक्तियां समाप्त नहीं होतीं। यदि अदालत के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्य किसी व्यक्ति की संलिप्तता का संकेत देते हैं, तो ट्रायल कोर्ट उसे अतिरिक्त आरोपी के रूप में तलब कर सकती है। जस्टिस मनीषा बत्रा ने महेंद्रगढ़ में हत्या के मामले में प्रीतम कुमार की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया।

याचिकाकर्ता ने नारनौल की अतिरिक्त सत्र अदालत द्वारा 12 जनवरी 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत तलब किया गया था।

यह मामला 9 अक्टूबर 2021 को सदर कनीना थाना में दर्ज हत्या के मुकदमे से संबंधित है, जिसमें प्रीतम कुमार का नाम भी हमलावरों में था। हालांकि, पुलिस ने उसे निर्दोष मानते हुए उसके खिलाफ चालान पेश नहीं किया और केवल छह अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया।

ट्रायल के दौरान अभियोजन ने पहले धारा 319 के तहत याचिकाकर्ता को तलब करने का आवेदन वापस ले लिया था, लेकिन लगभग दो वर्ष बाद नया आवेदन दायर किया गया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में दलील दी कि पुलिस ने उसे पहले ही निर्दोष घोषित किया था और नए साक्ष्य नहीं आए हैं।

राज्य सरकार ने कहा कि ट्रायल के दौरान गवाहों के बयानों में याचिकाकर्ता की भूमिका स्पष्ट है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि यदि रिकॉर्ड पर आए साक्ष्य किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता दर्शाते हैं, तो उसे भी मुकदमे में शामिल किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की राय अंतिम नहीं होती। इस प्रकार, पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई।

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