सरकारी दस्तावेजों को देखने के लिए आरोपियों के खिलाफ OSA नहीं लगा सकते, सुप्रीम कोर्ट का अहम निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त करना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हिस्सा है और आप इसके लिए उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) नहीं लगा सकते है…

सौजन्य से:- Navbharat Times
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त करना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का हिस्सा है और आप इसके लिए उसके खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (ओएसए) नहीं लगा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार अनुच्छेद 21 सर्वोपरि है
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि अभियोजन पक्ष आरोपी को चार्जशीट या किसी और सरकारी दस्तावेज तक पहुंच से वंचित नहीं कर सकता। न्यायालय ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार अनुच्छेद 21 सर्वोपरि है और ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट ( OSA ) की आड़ में बचाव पक्ष को साक्ष्य देने से नहीं रोका जा सकता।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह कथित गुप्त गोपनीय दस्तावेज मेजर जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) को उपलब्ध कराए, जिन पर ओएसए के तहत मुकदमा चल रहा है।
आरोपियों को दस्तावेज देखने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, आरोपी को उन सभी दस्तावेजों की प्रतियां पाने का अधिकार है जिनका इस्तेमाल अदालत में उसके खिलाफ किया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दस्तावेजों को रोकना आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 का हिस्सा है इस्तेमाल अदालत में उसके खिलाफ किया जा रहा है।
ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (OSA) क्या है?
ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट या ओएसए भारत के खिलाफ जासूसी रोकने का एक कानून है, जो मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और देश से जुड़ी सामरिक जानकारी को गुप्त रखने के लिए बनाया गया है।
इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य अनधिकृत रूप से किसी सरकारी दस्तावेज को चुराने या देखने से रोकना है।
यह एक्ट सुनिश्चित करता है कि देश के गुप्त दस्तावेज या रणनीतिक योजनाएं दुश्मनों या बाहरी ताकतों के हाथ न लगें।
यह कानून भारत और विदेश में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों पर लागू होता है। इसके अंतर्गत सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक दोनों आते हैं।
यदि कोई विदेशी नागरिक भारत के खिलाफ जासूसी गतिविधियों में शामिल होता है, तो उस पर भी यह कानून लागू होता है।
लेखक के बारे मेंसंजीव कुमारसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)
संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।
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संजीव कुमार खास तौर पर मौसम की खबर, नेशनल और राजनीति की खबर, ब्रेकिंग न्यूज, रियल टाइम खबरें, एक्सप्लेनर और रिसर्च आधारित खबरें करते हैं। इसके अलावा वह हर तरह के इवेंट का पल-पल का लाइव कवरेज भी करते हैं।
पत्रकारिता अनुभव
संजीव कुमार ने पत्रकारिता में स्नातक और मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां उन्होंने हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, स्पेशल खबरों को यूजर के इंटरेस्ट के अनुसार बनाने के तरीके को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने वन इंडिया हिंदी में नेशनल डेस्क पर काम किया। फिर दैनिक जागरण में बिहार-झारखंड की लोकल खबरों पर 1 साल 6 महीने तक काम किया है। इसके बाद नवभारत टाइम्स में पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें
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