फ़र्जी NOC जारी करने पर बैंक कर्मी को 7 साल की सजा, 83.69 लाख का नुकसान
जयपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के पूर्व विशेष सहायक मुरारी लाल मीणा को बिना अनुमति के फर्जी नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने के लिए सात साल की कठोर कारावास और 4.30 लाख रुपये जुर्माना सुनाया। इस धोखाधड़ी से बैंक की 25 लोन खातों में कुल 83 लाख 69 हजार 495 रुपये का नुकसान हुआ।

सौजन्य से:- ETV Bharat
फर्जी NOC जारी कर बैंक को लगाया 83.69 लाख का चूना, आरोपी कर्मचारी को 7 साल की कैद
जयपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन विशेष सहायक मुरारी लाल मीणा को सात साल की सजा सुनाई है.
Published : September 2, 2026 at 6:15 PM IST
जयपुर: राजधानी की विशेष सीबीआई अदालत ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के तत्कालीन विशेष सहायक मुरारी लाल मीणा को दोषी करार देते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 4 लाख 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह मामला दौसा जिले के लालसोट स्थित तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा से जुड़ा है. सीबीआई के अनुसार, मुरारी लाल मीणा ने बैंक में अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग करते हुए बिना अधिकृत अनुमति के कई ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी किए थे. इन प्रमाणपत्रों के आधार पर उन संपत्तियों को भी जारी करने की प्रक्रिया में मदद मिली, जिन पर संबंधित ऋण खातों की देनदारी बकाया थी.
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष सीबीआई अदालत, जयपुर ने 1 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाया. अदालत ने मुरारी लाल मीणा को दोषी करार देते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही उन पर 4.30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. सीबीआई के अनुसार, मामला लालसोट, जिला दौसा स्थित तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा में हुए वित्तीय अनियमितता और बैंक को हुए नुकसान से संबंधित था. अदालत का यह फैसला बैंकिंग व्यवस्था में पद के दुरुपयोग और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी से जुड़े मामलों में अहम माना जा रहा है.
इसे भी पढ़ें- बिना दस्तावेजों के 17 लोन पास करने वाले पूर्व बैंक मैनेजर को 7 साल की सजा, 26 लाख जुर्माना
25 लोन खातों में बैंक को हुआ नुकसान: जांच एजेंसी के मुताबिक, अनधिकृत ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी किए जाने के कारण बैंक की गिरवी संपत्तियों पर उसका अधिकार प्रभावित हुआ. इस पूरी प्रक्रिया से बैंक को 25 अलग-अलग लोन खातों में कुल 83 लाख 69 हजार 495 रुपये का गलत तरीके से नुकसान हुआ. सीबीआई ने जांच में आरोप लगाया था कि बैंक के विशेष सहायक के पद पर रहते हुए मुरारी लाल मीणा ने अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों और अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया. उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक अनुमति के बिना प्रमाणपत्र जारी किए, जिससे बैंक के हितों को वित्तीय नुकसान पहुंचा.
2017 में शुरू हुई थी सीबीआई जांच: सीबीआई ने मामले में 20 दिसंबर 2017 को जांच शुरू की थी. यह कार्रवाई दौसा जिले के लालसोट स्थित तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की शाखा की ओर से दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के आधार पर की गई. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उस समय बैंक में विशेष सहायक के पद पर कार्यरत मुरारी लाल मीणा ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और बिना सक्षम अनुमति के ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ जारी किए. इन प्रमाणपत्रों के चलते बैंक की बकाया ऋण राशि की वसूली से जुड़ी प्रक्रिया प्रभावित हुई.
2019 में दाखिल किया गया आरोपपत्र: सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद 28 अगस्त 2019 को मुरारी लाल मीणा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया. मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने 23 जनवरी 2024 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए . इसके बाद अदालत में मामले की विस्तृत सुनवाई हुई. सीबीआई की ओर से पेश साक्ष्यों और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर अदालत ने मुरारी लाल मीणा को सभी आरोपों में दोषी पाया.
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