विवाद का नीरस समापन, सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर क्लब के जमीन विवाद मामले में अंतरिम स्टे पर लगाई रोक
मुजफ्फरपुर क्लब के जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे लगा दिया है। इससे क्लब कमेटी को फिलहाल राहत मिली है। यह मामला 1983 से चल रहा है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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मुजफ्फरपुर क्लब के जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम स्टे, कमेटी को राहत
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भास्कर खास
मुजफ्फरपुर क्लब के जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे लगा दिया है। इसकी लगभग 9.43 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।
दो माह पूर्व हाईकोर्ट ने दूसरी अपील खारिज करते हुए जैतपुर स्टेट के पक्ष को सही माना था। हाईकोर्ट ने क्लब की जमीन के मालिकाना हक देने के सबजज-7 के सितंबर 2015 के फैसले को बरकरार रखा था। अब सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम स्टे लगने से क्लब कमेटी को फिलहाल राहत मिली है। मुजफ्फरपुर क्लब कमेटी के सचिव अविनाश साहू ने इसका स्वागत किया है।
क्लब कमेटी के अध्यक्ष संजीव कुमार अनवर ने बताया कि मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज बीवी नागर| व आर. महादेवन के बेंच में हुई। कमेटी की आेर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण अन्य ने पक्ष रखा। क्लब कमेटी की ओर से दाखिल पहली अपील मुजफ्फरपुर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश- नौ के कोर्ट में मार्च 2021 में खारिज हो गई थी। इसके बाद क्लब कमेटी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। मालिकाना हक को लेकर जैतपुर स्टेट और मुजफ्फरपुर क्लब कमेटी के बीच 1983 से कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। मामले की जल्द सुनवाई को लेकर जैतपुर स्टेट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इस पर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का निर्देश हाईकोर्ट को निर्देश दिया था।
1885 में क्लब को लीज पर दी गई थी जमीन
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, 1983 से केस चल रहा
मुजफ्फरपुर क्लब का इतिहास ब्रिटिशकाल से जुड़ा है। ब्रिटिश काल में अंग्रेज अधिकारी क्लब को संचालित करते थे। 1885 में यह जमीन क्लब के अंग्रेज संचालक एएन स्टुअर्ट को िजमखाना के लिए 25 रुपए प्रतिमाह लीज पर दी गई थी। 1889 में जैतपुर स्टेट के तत्कालीन मालिक चौधरी महंथ रघुनाथ दास ने इसे 50 रुपए प्रतिमाह रजिस्टर्ड पट्टा कर दिया।
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