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भोजशाला: सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में नमाज पढ़ने की मांग को ठुकराया

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षों की अपील पर सुनवाई करने पर सहमति दी, जिसमें भोजशाला को मंदिर घोषित किया गया है. कोर्ट ने शुक्रवार को परिसर में नमाज पड़ने की मांग को मंजूरी नहीं दी. कोर्ट ने कहा कि परिसर में नमाज पढ़ने के लिए अपील करने वालों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को संबंधित परिसर से सटी एक अलग खुली जगह दी जा सकती है।

14 जुलाई 2026 को 05:15 pm बजे
भोजशाला: सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में नमाज पढ़ने की मांग को ठुकराया

सौजन्य से:- ETV Bharat

भोजशाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर के अंदर नमाज पढ़ने की मांग ठुकराई - NO NAMAZ BHOJSHALA PREMISES

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Published : July 14, 2026 at 9:37 PM IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार की भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की 3 याचिकाओं पर एक साथ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षों की अपील पर सुनवाई करने पर सहमति जताई. कोर्ट ने शुक्रवार को परिसर में नमाज पढ़ने की मुस्लिम पक्षों की मांग को मंजूरी नहीं दी. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी.मोहना की बेंच ने की. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ़ मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर 3 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) से जवाब मांगा है. बेंच ने कहा "शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए अपील करने वालों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को संबंधित परिसर से सटी एक अलग खुली जगह दी जा सकती है." कोर्ट ने साफ किया "यह व्यवस्था अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी और यह अस्थायी होगी. इससे दोनों पक्षों के दावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा." सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया "ASI कोई ढांचागत बदलाव न करे." मुस्लिम पक्ष के वकील ने तर्क दिया "2003 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था, जिसके तहत तय दिनों पर उस जगह पर हिंदू और मुस्लिम पूजा कर सकते थे, को इस दौरान जारी रहने दिया जाना चाहिए. उनके मुवक्किलों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है." कोर्ट ने कहा "ये बहुत संवेदनशील मामला है. कोर्ट में कही गई बातों से बेवजह विवाद पैदा हो सकते हैं या ग़लत संदेश जा सकता है. हमें इस्तेमाल की जाने वाली हर बात को लेकर बहुत सावधान रहना होगा."

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा धार की भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की 3 याचिकाओं पर एक साथ मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्षों की अपील पर सुनवाई करने पर सहमति जताई. कोर्ट ने शुक्रवार को परिसर में नमाज पढ़ने की मुस्लिम पक्षों की मांग को मंजूरी नहीं दी. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी.मोहना की बेंच ने की. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ़ मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर 3 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) से जवाब मांगा है. बेंच ने कहा "शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए अपील करने वालों और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों को संबंधित परिसर से सटी एक अलग खुली जगह दी जा सकती है." कोर्ट ने साफ किया "यह व्यवस्था अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी और यह अस्थायी होगी. इससे दोनों पक्षों के दावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा." सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया "ASI कोई ढांचागत बदलाव न करे." मुस्लिम पक्ष के वकील ने तर्क दिया "2003 से चली आ रही पुरानी व्यवस्था, जिसके तहत तय दिनों पर उस जगह पर हिंदू और मुस्लिम पूजा कर सकते थे, को इस दौरान जारी रहने दिया जाना चाहिए. उनके मुवक्किलों को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया है." कोर्ट ने कहा "ये बहुत संवेदनशील मामला है. कोर्ट में कही गई बातों से बेवजह विवाद पैदा हो सकते हैं या ग़लत संदेश जा सकता है. हमें इस्तेमाल की जाने वाली हर बात को लेकर बहुत सावधान रहना होगा."

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