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महाराष्ट्र में मतांतरण रोधी कानून लागू, चर्चों में श्रद्धालुओं से भरवाए जा रहे स्वघोषणा पत्र - mumbai churches mandate selfdeclaration under anticonversion law

महाराष्ट्र में मतांतरण रोधी कानून लागू, चर्चों में श्रद्धालुओं से भरवाए जा रहे स्वघोषणा पत्र महाराष्ट्र में नए मतांतरण विरोधी कानून के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र के चर्च श्रद्धालुओं से स्वघोषणा पत्र भरवा रहे हैं। HighLight…

25 अगस्त 2026 को 03:55 pm बजे
महाराष्ट्र में मतांतरण रोधी कानून लागू, चर्चों में श्रद्धालुओं से भरवाए जा रहे स्वघोषणा पत्र - mumbai churches mandate selfdeclaration under anticonversion law

सौजन्य से:- Jagran

महाराष्ट्र में मतांतरण रोधी कानून लागू, चर्चों में श्रद्धालुओं से भरवाए जा रहे स्वघोषणा पत्र

महाराष्ट्र में नए मतांतरण विरोधी कानून के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र के चर्च श्रद्धालुओं से स्वघोषणा पत्र भरवा रहे हैं।

HighLights

- महाराष्ट्र में नया मतांतरण विरोधी कानून लागू हुआ।

- मुंबई के चर्च श्रद्धालुओं से स्वघोषणा पत्र भरवा रहे हैं।

- यह कदम चर्च और समुदाय की सुरक्षा हेतु है।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। महाराष्ट्र में नया मतांतरण विरोधी कानून लागू होने के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के कई चर्चों ने अपने यहां आने वाले श्रद्धालुओं से स्वघोषणा पत्र भरवाना शुरू कर दिया है। इसमें श्रद्धालुओं से यह घोषित कराया जा रहा है कि वे अपनी इच्छा से चर्च में प्रार्थना करने आ रहे हैं और उन पर किसी तरह का दबाव, प्रलोभन या जोर-जबरदस्ती नहीं है। चर्च प्रबंधन का कहना है कि यह कदम किसी विवाद की स्थिति में समुदाय और चर्च की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

वसई के पादरी सैम मैथाई ने एक बयान में कहा है कि पिछले दो-तीन महीनों से श्रद्धालुओं से ये फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। भरे हुए फॉर्म चर्च कार्यालयों में सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस या सरकारी अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए जा सकें।

उन्होंने बताया कि कुछ चर्चों में ऐसे लोगों से भी स्वघोषणा पत्र लिया जा रहा है, जो जन्म से ईसाई नहीं हैं, जबकि कुछ चर्च नियमित रूप से आने वाले श्रद्धालुओं से भी यह प्रक्रिया पूरी करा रहे हैं।

मैथाई के अनुसार, एमएमआर में चार हजार से अधिक चर्च हैं। उनका दावा है कि पिछले छह महीनों में क्षेत्र में चर्चों पर 11 हमले हुए हैं। इनमें वसई-विरार, पालघर, नालासोपारा और भायंदर जैसे इलाके प्रमुख हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोग बिना सूचना चर्चों में प्रवेश कर प्रार्थना कर रहे लोगों के साथ मारपीट करते हैं।

उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं के बाद पादरियों और समुदाय के नेताओं ने मिलकर सुरक्षा के लिए यह रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को चर्च में प्रार्थना करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता। भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छा से पूजा और प्रार्थना करने की स्वतंत्रता देता है।

इसी तरह भांडुप के पादरी देवदान त्रिभुवन ने कहा कि चर्चों के पास नियमित श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड मौजूद है। यह समुदाय शांतिपूर्ण है और किसी भी तरह की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं देने का फैसला किया गया है। उनके अनुसार, चर्च आने वाले लोगों से यह स्वघोषणा इसलिए ली जा रही है ताकि यह स्पष्ट रहे कि वे स्वेच्छा से प्रार्थना के लिए आए हैं।

त्रिभुवन ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में कुछ लोगों ने चर्चों में प्रार्थना के दौरान व्यवधान पैदा किया और जबरन अंदर आकर पूछताछ की कि वहां क्या गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय राज्य की कुल आबादी का करीब 2.3 प्रतिशत है।

ईसाई संस्थानों में लाखों विद्यार्थी पढ़ते हैं और गैर-ईसाई लोग भी वहां काम करते हैं तथा शिक्षा ग्रहण करते हैं। यदि जबरन धर्मांतरण के आरोप सही होते तो समुदाय की संख्या में वृद्धि दिखाई देती।

बता दें कि महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 30 जुलाई को राजपत्र अधिसूचना के जरिए लागू किया गया। कानून में दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के जरिए धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

इसके तहत धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर सात वर्ष तक की सजा का प्रविधान है। चर्च समुदाय का कहना है कि वह कानून का सम्मान करता है, लेकिन पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई और प्रार्थना के दौरान सुरक्षा की अपेक्षा रखता है।

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