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प्रशांत किशोर: विधायक के अधिकारों की नई परिभाषा

बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर ने कुछ ही समय में बताया कि एक MLA क्या कर सकता है: रोजगार दे सकता है, शासन व्यवस्था को सुदृढ़ कर सकता है और योजनाएँ बनाकर अधिकारी सहयोगी बनाते हैं। उनके डेटा‑आधारित योजनाओं को टॉप ब्यूरोक्रेट्स ने सुना, जिससे बिहार में राजनीतिक‑प्रशासनिक संवाद में नया आयाम खुला।

29 अगस्त 2026 को 05:31 am बजे
प्रशांत किशोर: विधायक के अधिकारों की नई परिभाषा

सौजन्य से:- Navbharat Times

Prashant Kishore News- बिहार के टॉप ब्यूरोक्रेट बांकीपुर से निर्वाचित प्रशांत किशोर से मुलाकत कर रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कुछ ही समय में ये बताने की कोशिश की कि एक विधायक क्या-क्या कर सकता है?

पटनाः बिहार की राजनीति में 27 अगस्त को एक दुर्लभ नजारा दिखा। जिस राज्य के अफसरों पर मंत्रियों, विधायकों के फोन नहीं उठाने का आरोप लगता है, उसी राज्य के टॉप ब्यूरोक्रेट महज एक विधायक से ‘राउंड टेबल टॉक’ के लिए सहज उपलब्ध हो गये। गुरुवार को बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर के साथ मुख्य सचिव, डीजीपी समेत राज्य 6 प्रमुख अफसरों की वार्ता, सत्ता के गलियारे में चर्चा का विषय है।

टीएन शेषन ने बताया था कि एक CEC क्या सकता है? अब PK बता रहे हैं कि एक MLA क्या-क्या कर सकता है?

एक विधायक के अधिकार और कर्तव्य, कानून की किताबों में तो संविधान निर्माण के समय से ही दर्ज हैं। लेकिन सियासी मसरूफियत की वजह से इस बंद किताब को सही मायने में किसी ने खोला नहीं था। चूंकि विधायकप्रशांत किशोर लीक से हट कर राजनीति करने आये हैं, इसलिए उन्होंने किताब पर पड़ी वक्त की धूल को साफ किया और इसके पन्ने पलटे। अब वे सरकार और जनता को बता रहे हैं कि एक विधायक क्या-क्या कर सकता है। वह रोजगार दे सकता है, शासन व्यवस्था के ढीले कल-पुर्जे टाइट कर सकता है। एक विधायक चाहे तो बहुत कुछ कर सकता है। यह कदम ठीक वैसा ही है जैसे 1995 में टीएन शेषन ने पहली बार देश को बताया था कि एक मुख्य चुनाव आयुक्त फ्री एंड फेयर इलेक्शन के लिएक्या-क्या कर सकता है।

नॉलेज इज पावर

ब्रिटिश दार्शनिक फ्रांसिस बेकन ने कहा था, नॉलेज इज पावर, यानी ज्ञान की सबसे बड़ी शक्ति है। इंग्लैंड के ही एक अन्य प्रसिद्ध दार्शनिक थॉमस हॉब्स ने बेकन के इस कथन को और विस्तार दिया था। हॉब्स ने कहा था, किताबी बातों को रटना ज्ञान नहीं है। ज्ञान का वैज्ञानिक रास्ता तर्क मार्ग की गति से निर्धारित होता है। ‘कॉज एंड इफैक्ट’ (कार्य, कारण और प्रभाव) को समझने की क्षमता ही वास्तविक ज्ञान है। बेकन और हॉब्स के नजरिये से देखा जाए तो वास्तविक ज्ञान (रीयल नॉलेज) कुछ ही लोग हासिल कर पाते हैं। टीएन शेषन और प्रशांत किशोर को ऐसे ही व्यक्तियों में शामिल माना जा सकता है।

एक ऐसा विधायक जो बिल्कुल नया और अलग सोच रहा

बिहार में 243 विधायक हैं। सदन की यह संख्या पिछले 26 साल से है। लेकिन आज तक किसी विधायक के दिमाग में यह नहीं कौंधा कि वह अकेले भी कुछ लोगों को नौकरी या रोजगार दे सकता है। पहली बार यह विचार प्रशांत किशोर के दिमाग में ही क्यों आया? जाहिर एक राजनीतिज्ञ के रूप में उनके सोचने-समझने का तरीका अन्य लोगों से हट कर है। बांकीपुर को बिहार का ‘मॉडल कंस्टीटुएंसी’ बनाना, उनकी कार्य योजना का पहला एजेंडा है। इसके लिए वे कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। बांकीपुर के सरकारी स्कूलों को सुधारने का अभियान चला कर वे राज्य में एक नया उदाहरण पेश करना चाहते हैं। जाहिर यह काम अधिकारियों के सहयोग से ही संभव होगा।

आखिर टॉप ब्यूरोक्रेट क्यों सुन रहे हैं प्रशांत किशोर की बात?

शिकायत रहती है कि बिहार के अधिकारी, विधायकों की बात नहीं सुनते, या फोन नहीं उठाते। फिर वे प्रशांत किशोर की बात सुनने के लिए क्यों उत्सुक और तत्पर हैं? इसी मोड़ पर ‘नॉलेज इज पावर’ की महत्ता सामने आती है। प्रशांत किशोर आम विधायकों की तरह सिर्फ शिकायत नहीं करते बल्कि वे समस्या का डेटा आधारित ब्लूप्रिंट तैयार करते हैं, साथ ही साथ व्यवहारिक और वैज्ञानिक समाधान का विकल्प भी पेश करते हैं। उन्होंने पटना की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए डीजीपी के सामने एक तीन वर्षीय योजना का प्रस्ताव रखा जिसे देश के शीर्ष संस्थानों और विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया गया है। प्रशांत किशोर ने बिहार के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी एक ढांचा पेश किया है जिस पर सितम्बर में एक कार्यशाला होने वाली। चूंकि प्रशांत किशोर समस्या के साथ समाधान भी पेश करते हैं, इसलिए बड़े अधिकारी उनकी बात सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं।

हर बात का तार्किक आधार, इसे खारिज करना मुश्किल

प्रशांत किशोर कोई भी बात हवा में नहीं करते। जो कहते हैं उसका एक तार्किक आधार होता है। आठ वर्षों तक संयुक्त राष्ट्र में काम करने का अनुभव अब उनके काम आ रहा है। यूनिसेफ के सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत उन्होंने फील्ड सर्वे, संख्यिकी और पब्लिक पॉलिसी डेटा पर बहुत काम किया था। इसलिए अब वे विधायक बनने के बाद जनहित के लिए सटीक और कारगर योजनाएं बना पा रहे हैं। सबसे बड़ी बात ये कि उनकी टीम में कई प्रतिभाशाली लोग शामिल हैं। जिनमें पूर्व IFS, पूर्व IAS, पूर्व IPS, IIT और IIM में पढ़े प्रोफेशनल शामिल हैं। इन महारथियों की मदद से वे ग्राउंड डाटा का एनालिसिस करते हैं और फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। इसलिए कोई अफसर, प्रशांत किशोर की बात को आसानी से खारिज नहीं कर सकता। मजबूरन उनसे मिलना और सुनना पड़ता है।

लेखक के बारे मेंअशोक कुमार शर्माअशोक कुमार शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। वे बिहार की राजनीति और समाज को बखूबी समझते हैं और उसमें हो रहे बदलावों पर बारीक नजर रखते हुए विश्लेषण करते हैं। उन्होंने बिहार में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों की स्पेशल रिपोर्टिंग की है। प्रिंट (हिन्दुस्तान)और इलेक्ट्रॉनिक (मौर्य टीवी)मीडिया में काम करने का अनुभव है। डिजिटल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर लिखा है। राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर अशोक शर्मा फिलहाल NBT (Digital)के साथ कंसलटेंट राइटर के तौर पर बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के लिए विशेष सामग्री लिख रहे हैं।... और पढ़ें

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