सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों जैसा मुकदमा संभव
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, अगर कुछ कानूनी शर्तें पूरी होती हैं। यह फैसला किशोर न्याय कानून के तहत हत्या को जघन्य अपराध बताकर दिया गया है।

सौजन्य से:- Jagran
'हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों जैसा मुकदमा संभव', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हत्या के आरोपी नाबालिगों पर कुछ कानूनी शर्तों के तहत बालिगों की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट: हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों जैसा मुकदमा संभव।
- किशोर न्याय कानून के तहत हत्या जघन्य अपराध की श्रेणी में।
- पटना हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील खारिज की गई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर कानूनी शर्तें पूरी होती हैं तो हत्या के आरोपित नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत ऐसा अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी आता है।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी एक नाबालिग की अपील को खारिज करते हुए की। उसने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें एक लड़के की हत्या के मामले में उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।
हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों जैसा मुकदमा संभव
नाबालिगों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने के कानूनी ढांचे को स्पष्ट करने के उद्देश्य से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि हत्या (आइपीसी की धारा 302) को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 के तहत जघन्य अपराध माना जाना चाहिए।
यह फैसला 16 वर्षीय किशोर की ओर से दाखिल अपील पर आया है, जिसने बिहार में कथित रूप से एक लड़के की गर्दन काट दी थी।
हाई कोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता पर एक बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने की आवश्यकता है और इसी के अनुसार, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को इस मामले को नियमित अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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