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यूएपीए मामले में देरी पर हाई कोर्ट की सख्ती

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूएपीए मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी जताई और विशेष अदालत से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। मामले में दो आतंकियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और उन्हें 17 फरवरी 2021 से जेल में रखा गया है।

7 अगस्त 2026 को 04:15 am बजे
यूएपीए मामले में देरी पर हाई कोर्ट की सख्ती

सौजन्य से:- जागरण

यूएपीए मामले की सुनवाई में देरी पर हाई कोर्ट सख्त, विशेष अदालत से मांगी रिपोर्ट

लखनऊ हाई कोर्ट ने दो आतंकियों के खिलाफ यूएपीए मामले की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें

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विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दो आतंकियों के खिलाफ चल रहे यूएपीए मामले की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है।

अदालत ने विशेष एनआइए-एटीएस अदालत, लखनऊ से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि हाई कोर्ट के बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों का अपेक्षित तत्परता से पालन नहीं किया। प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि मुकदमे में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत आरोपितों के शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार की रक्षा का प्रश्न भी सामने आता है।

मामले में आरोपित अंसाद बदरुद्दीन और फिरोज 17 फरवरी 2021 से जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

हाई कोर्ट ने सात दिसंबर 2022 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाते हुए यथासंभव एक वर्ष के भीतर उसका निस्तारण किया जाए। इसके बाद जनवरी 2024 में भी अदालत ने आदेश दिया था कि किसी गवाह की मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद उसकी जिरह तत्काल कराई जाए और सभी गवाहों की मुख्य परीक्षा पूरी होने तक जिरह लंबित न रखी जाए।

सुनवाई पूरी न होने पर आरोपितों ने दोबारा जमानत याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के कुल 18 गवाह हैं, लेकिन एफआइआर के सूचक पीडब्ल्यू-2 की जिरह अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

अदालत ने यह भी कहा कि वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिरह का अवसर देने सहित कई कदम उठाने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

हाई कोर्ट ने ट्रायल जज से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि पूर्व आदेशों और जनवरी 2024 के निर्देशों का प्रभावी पालन क्यों नहीं हुआ तथा मुकदमे की सुनवाई अब तक पूरी क्यों नहीं हो सकी। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी।

न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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