सुप्रीम कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद बम धमाका मामले में अहमद बावा की फांसी पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम विस्फोट केस में दोषी ठहराए गए अहमद बावा (अबूबकर बरेलवी) की फांसी पर अंतरिम रोक तय की। इस निर्णय के तहत गुजरात हाई कोर्ट के 7 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया गया और बरेलवी की मौत की सजा को स्थगित किया गया।

सौजन्य से:- Navbharat Times
2008 Ahmedabad Blast Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में अहम फैसला दिया है। धमाकों में दोषी करार दिए गए अहमद बावा उर्फ अबूबकर बरेलवी की फांसी पर शीर्ष अदालत ने रोक लगाई है। जान लीजिए पूरा मामला।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाका मामले में मौत की सजा पाए अहमद बावा उर्फ अबूबकर बरेलवी की फांसी पर रोक लगा दी है। बरेलवी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य था। वो 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम विस्फोटों के लिए दोषी ठहराया गया था। इन धमाकों में 56 लोगों की जान गई थी। शीर्ष कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।
गुजरात सरकार को नोटिस
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस संदीप मेहता की विशेष पीठ ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ बरेलवी की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान बेंच ने अंतरिम आदेश पारित किया। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने 2008 के विस्फोट मामले में बड़ी संख्या में हताहतों का हवाला देते हुए 7 जुलाई को इंडियन मुजाहिदीन के 38 गुर्गों के मौत की सजा को बरकरार रखा था।
क्या है पूरा मामला
हाईकोर्ट ने 11 अन्य दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को भी बरकरार रखा था। यह मानते हुए कि गुजरात और केरल में आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों और साजिश को सैन्य समर्थन देने में उनकी भूमिका साबित हुई थी। 26 जुलाई 2008 को, अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में 21 बम विस्फोटों की श्रृंखला में 56 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए था।
35 एफआईआर, 548 चार्जशीट
हाईकोर्ट ने दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया था था और विशेष अदालत के फरवरी 2022 के फैसले की पुष्टि की थी। इसमें आईएम के 38 सदस्यों को मौत की सजा और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस मामले में व्यापक के आधार पर 35 एफआईआर दर्ज की गईं और 548 आरोपपत्र दाखिल किए गए।
ट्रायल कोर्ट के फैसले में क्या था
हजारों सबूतों और 1,163 गवाहों की जांच के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला लगभग 7,000 पन्नों का था, जबकि मामले की केस फाइल में लगभग 7.88 लाख पन्ने थे। इस मामले के आरोपी देश के अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले थे, जिनमें गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और झारखंड शामिल थे।
इन धाराओं में चला मुकदमा
उन पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और शस्त्र अधिनियम समेत कई कानूनों के तहत मुकदमा चलाया गया। सेशन कोर्ट की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद गुजरात सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया और 38 दोषियों के खिलाफ सजा के क्रियान्वयन की मांग की। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया है। साथ ही उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी है।
लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
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पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
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