सुप्रीम कोर्ट में वकील की बदसलूकी, क्या हो सकती है 6 महीने की जेल?
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने कथित तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ बदसलूकी की और कोर्ट में हंगामा किया। इस मामले में वकील को 6 महीने तक की साधारण कैद या जुर्माना हो सकता है। साथ ही, बार काउंसिल वकील का लाइसेंस निलंबित कर सकती है।

सौजन्य से:- ABP News
CJI Abuse: सुप्रीम कोर्ट में जज के सामने CJI को दी गाली, इस मामले में कितनी हो सकती थी सजा?
CJI Abuse: हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने कथित तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ बदसलूकी की और कोर्ट में हंगामा किया. आइए जानते हैं कि इसके लिए उसे क्या सजा मिल सकती है.
- वकील ने सीजेआई से बदसलूकी की, कार्यवाही बाधित की।
- यह कृत्य आपराधिक अवमानना है, सजा 6 माह कैद संभव।
- बार काउंसिल वकील का लाइसेंस निलंबित कर सकती है।
CJI Abuse: सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ी घटना हुई जब एक वकील ने कथित तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ बदसलूकी की. वकील ने कोर्ट रूम में कागज फेंकें और जजों के सामने कार्यवाही में बाधा डाली. ऐसी घटनाओं को काफी गंभीर माना जाता है क्योंकि इससे देश की सबसे बड़ी न्यायिक संस्था की गरिमा और अधिकार को नुकसान पहुंच सकता है. भारतीय कानून के तहत ऐसा व्यवहार जो कोर्ट के कार्रवाई में बाधा डालता है या फिर न्यायपालिका के अधिकार को कम करता है उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के अलावा क्रिमिनल कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई भी हो सकती है.
क्यों है यह क्रिमिनल कंटेंप्ट?
कोर्ट रूम के अंदर भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ मौखिक बदसलूकी, हवा में दस्तावेज फेंकना और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना क्रिमिनल कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट के दायरे में आता है. अवमानना कानून का मकसद यह पक्का करना है कि अदालत स्वतंत्र रूप से और बिना किसी बाधा के काम कर सके और साथ ही न्यायिक प्रणाली में जनता का भरोसा बना रहे.
कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 ऐसे काम से निपटने के लिए कानूनी ढांचा देती है. अगर अदालत इस नतीजे पर पहुंचती है कि किसी भी व्यक्ति के व्यवहार ने अदालत की बदनामी की है, न्यायिक कार्यवाही में दखल दिया है या फिर न्याय प्रशासन में बाधा डाली है तो वह अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती है.
क्या मिल सकती है सजा?
कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 की धारा 12 के तहत अवमानना का दोषी पाए जाने पर किसी भी व्यक्ति को 6 महीने तक की साधारण कैद, ₹2000 तक का जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं. अदालत मामले के तथ्य और दुर्व्यवहार की प्रकृति पर विचार करने के बाद सजा तय करती है.
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सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक शक्तियां
सुप्रीम कोर्ट को अपनी शक्तियां सीधे संविधान से मिलती हैं. अनुच्छेद 129 सुप्रीम कोर्ट को कोर्ट ऑफ रिकॉर्ड घोषित करता है. साथ ही उसे अपनी अवमानना के लिए सजा देने का अधिकार देता है. इसका मतलब है कि शीर्ष अदालत उस घटना का अपने आप संज्ञान ले सकती हैं जो उसकी गरिमा को प्रभावित करती हैं या फिर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालती हैं.
प्रेक्टिस करने का अधिकार खत्म
क्योंकि इसमें शामिल व्यक्ति एक वकील है इस वजह से यह मामला एडवोकेट्स एक्ट 1961 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की वजह भी बन सकता था. संबंधित बार काउंसिल इस बात की जांच कर सकती है कि क्या वकील ने पेशावर दुर्व्यवहार किया है. जांच के नतीजे के आधार पर अनुशासनात्मक अधिकारी वकील को एक तय समय के लिए प्रेक्टिस करने से रोक सकते हैं या फिर गंभीर मामलों में वकील का लाइसेंस भी रद्द हो सकता है. हालांकि कोर्ट ने वकील को माफ कर दिया है और उस पर कोई भी एक्शन लेने से मना कर दिया है.
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