नहीं मिली दर्शन को उम्मीद, सुप्रीम कोर्ट ने बेल अर्जी पर विचार करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की ज़मानत रोक पर स्पष्टीकरण के लिए दर्शन की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिससे कन्नड़ एक्टर को उम्मीद से कोसों दूर जाना पड़ा। दर्शन ने अपनी अर्जी में कहा था कि उन्होंने कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन किया है और ट्रायल में रुकावट नहीं डाली है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
रेणुकास्वामी मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने दर्शन की याचिका पर विचार करने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक साल की ज़मानत रोक पर स्पष्टीकरण के लिए दर्शन की याचिका पर विचार करने से किया इनकार कर दिया.
By Sumit Saxena
Published : July 3, 2026 at 8:29 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें उन्होंने इस साल 15 मई को पास हुए एक आदेश पर सफाई मांगी थी. इस आदेश में कहा गया था कि रेणुकास्वामी मर्डर केस में वह एक साल के लिए बेल के लिए पात्र नहीं हैं.
रजिस्ट्रार कोर्ट ने जांच प्रक्रिया के दौरान दर्शन की अर्जी पर सुनवाई नहीं की. इस मामले से जुड़े एक स्रोत से पता चला है कि रजिस्ट्रार कोर्ट ने देखा कि अर्जी में बदलाव की आड़ में आदेश की समीक्षा करने की मांग की गई थी.
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, दर्शन की अर्जी के मामले की स्थिति से पता चलता है कि उसका निपटारा हो चुका है, लेकिन कोई आदेश अपलोड नहीं किया गया है. अर्जी में कहा गया कि वह अगस्त 2025 से लगातार कस्टडी में हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बेल रद्द कर दी थी.
अर्जी में इस बात पर जोर दिया गया कि उन्होंने कोर्ट के सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया है और उन्होंने किसी भी तरह से कार्रवाई में देरी करने या ट्रायल में रुकावट डालने की कोशिश नहीं की है. अपनी अर्जी में, एक्टर ने सुप्रीम कोर्ट से यह साफ करने की अपील की कि उसका ऑर्डर काबिल कोर्ट पर बाद के विकास पर विचार करने पर पूरी तरह से रोक नहीं है.
उन्होंने कोर्ट से यह साफ करने की अपील की कि वह ट्रायल की प्रगति रुकने, लंबे समय तक जेल में रहने, सिर्फ औपचारिक गवाहों से पूछताछ, अहम अभियोजन पक्ष के साक्ष्य में देरी, या मेडिकल और मानवीय आधार पर राहत के लिए कोर्ट जा सकते हैं, जिससे उनकी आजादी पर असर पड़ रहा हो.
पिछले अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट से मिली उनकी बेल रद्द कर दी थी, यह कहते हुए कि “वह कोई भी हों, कितने भी ऊंचे पद पर हों, वह कानून से ऊपर नहीं हैं". सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के बेल ऑर्डर को कानूनी और प्रक्रिया के हिसाब से गलत और शक्ति का यांत्रिक उपयोग पाया, जिसमें उनकी आजादी से निष्पक्ष सुनवाई के लिए पैदा हुए बड़े जोखिम को नजरअंदाज किया गया.
15 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर एक साल के आखिर तक ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं होती है, तो वह मामले को उसी हिसाब से देखेगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई खास प्रगति नहीं होती है, तो वह फिर से बेल अर्जी दे सकते हैं. दर्शन ने नई जमानत याचिका के लिए आवेदन करने के लिए जरूरी समय को कम करने का आग्रह किया.
ये भी पढ़ें: रेणुकास्वामी मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन और अन्य के खिलाफ ट्रायल पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी
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