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कानूनी मातृभूमि में बच्चे की कस्टडी विदेशी अदालतों के आदेश का उल्लंघन कर नहीं मिल सकती : हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते।

3 जुलाई 2026 को 04:25 pm बजे
कानूनी मातृभूमि में बच्चे की कस्टडी विदेशी अदालतों के आदेश का उल्लंघन कर नहीं मिल सकती : हाईकोर्ट

सौजन्य से:- Amar Ujala

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विदेशी अदालतों का उल्लंघन कर बच्चे की कस्टडी नहीं ले पाएंगे माता-पिता : हाईकोर्ट

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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने विदेशी अदालतों के क्षेत्राधिकार में शामिल भारतीय बच्चों की कस्टडी को लेकर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने कनाडा की अदालत के आदेश के बावजूद बच्चे को भारत में रखे जाने वाले मामले में यह टिप्पणी की।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते। बच्चे को कनाडा भेजने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला एक अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद से जुड़ा है, जिसमें कनाडा की अदालत ने बच्चे को लौटाने का आदेश दिया था। लेकिन एक अभिभावक ने आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रख लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी अवहेलना से उत्पन्न स्थिति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कोर्ट की सहमति के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालती आदेशों का सम्मान आवश्यक है।

बच्चों का कल्याण सर्वोपरि

न्यायालय ने कहा कि बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए भी माता-पिता द्वारा जानबूझकर विदेशी आदेशों की अवज्ञा को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इससे फोरम शॉपिंग (अनुकूल अदालत चुनना) की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।

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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने विदेशी अदालतों के क्षेत्राधिकार में शामिल भारतीय बच्चों की कस्टडी को लेकर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी माता-पिता विदेशी अदालतों के आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रोके रखने का लाभ नहीं उठा सकता। अदालत ने कनाडा की अदालत के आदेश के बावजूद बच्चे को भारत में रखे जाने वाले मामले में यह टिप्पणी की।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालत के आदेश का पालन नहीं करने वाले अभिभावक बच्चे की कानूनी कस्टडी पर दावा नहीं कर सकते। बच्चे को कनाडा भेजने का निर्देश दिया गया है। यह फैसला एक अंतरराष्ट्रीय बाल कस्टडी विवाद से जुड़ा है, जिसमें कनाडा की अदालत ने बच्चे को लौटाने का आदेश दिया था। लेकिन एक अभिभावक ने आदेश की अवहेलना कर बच्चे को भारत में रख लिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी अवहेलना से उत्पन्न स्थिति को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। अदालत ने कोर्ट की सहमति के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालती आदेशों का सम्मान आवश्यक है।

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बच्चों का कल्याण सर्वोपरि

न्यायालय ने कहा कि बच्चे के कल्याण को सर्वोपरि मानते हुए भी माता-पिता द्वारा जानबूझकर विदेशी आदेशों की अवज्ञा को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। इससे फोरम शॉपिंग (अनुकूल अदालत चुनना) की प्रवृत्ति भी बढ़ सकती है।

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