सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिया बड़ा झटका, प्रवेश पर कैग ऑडिट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को बड़ा झटका दिया है, जिसने तीन प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों के कैग ऑडिट पर रोक लगा दी है। यह ऑडिट उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले 'रेगुलेटरी एसेट्स' (आरए) से जुड़ा है, जो वर्षों से जमा हुए भारीभरकम 38,500 करोड़ रुपये से जुड़ा है। अदालत ने बिजली रेगुलेटर 'दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन' (डीईआरसी) के कैग को नियुक्त करने के फैसले पर सवाल उठाया है और कहा है कि यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Supreme Court: शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार को दिया बड़ा झटका, प्राइवेट बिजली कंपनियों के कैग ऑडिट पर लगाई रोक
Fri, 03 Jul 2026 03:42 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 03 Jul 2026 03:42 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार द्वारा तीन प्राइवेट बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कैग ऑडिट के आदेश पर रोक लगा दी। यह मामला उपभोक्ताओं से वसूले जाने वाले 'रेगुलेटरी एसेट्स' (आरए) के तौर पर वर्षों में जमा हुए भारी-भरकम 38,500 करोड़ रुपये से जुड़ा है।
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जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बेंच ने कहा कि बिजली रेगुलेटर 'दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन' (डीईआरसी) के कैग को नियुक्त करने के फैसले की कानूनी वैधता पर सवाल उठते हैं, जिन पर न्यायिक निर्णय की जरूरत है।
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भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार को झटका देते हुए शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, अगले आदेश तक ऑडिट के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति के संबंध में 'अपेलट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी' (एपटेल) के निर्देश पर रोक रहेगी। इस दौरान कैग भी ऑडिट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाएगा।
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शीर्ष अदालत एपटेल के अप्रैल के फैसले के खिलाफ डीईआरसी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एपटेल ने अपने फैसले में कहा था कि ऑडिट का काम कैग को सौंपना कानूनी ढांचे के खिलाफ है और रेगुलेटर को ऑडिट के लिए एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
डिस्कॉम को नोटिस जारी करते हुए बेंच ने कहा, "यह सिविल अपील सीधे तौर पर इस मुद्दे से जुड़ी है कि क्या डीईआरसी द्वारा कैग के माध्यम से वितरण कंपनियों के ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करना कानूनी रूप से सही है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 15 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखी जाए। उस दिन डीईआरसी की याचिका पर एक रेगुलर बेंच सुनवाई करेगी, जिसने पिछले साल अगस्त में फैसला सुनाया था।
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