सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की प्रवासी निर्वासन नीति पर रोक समाप्त की
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रम्प सरकार की प्रवासियों को उनके मूल देशों के अलावा तीसरे देश में भेजने की नीति पर लगा प्रतिबंध हटाया, जिससे आपातकालीन याचिका के तहत प्रक्रिया जारी रह सके। इस निर्णय के बाद डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसे मानवाधिकार उल्लंघन कहा और कांग्रेस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

सौजन्य से:- Hindustan
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासियों के निर्वासन से रोक हटाई
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की प्रवासियों को निर्वासित करने की नीति पर लगी रोक हटा दी है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रवासियों को उनके मूल देश से इतर किसी तीसरे देश में भेजने की अनुमति दी। डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस फैसले की आलोचना की है।
वाशिंगटन, एजेंसी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की प्रवासियों को निर्वासित करने की नीति पर लगी रोक हटा दी। अदालत के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन प्रवासियों को उनके मूल देश से इतर किसी तीसरे देश में भेज सकेगा। जानकारी के अनुसार, अदालत ने ट्रंप प्रशासन की आपातकालीन याचिका को मंजूरी देते हुए निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी। निचली अदालत ने कुछ दिन पहले निर्वासित किए जा रहे लोगों को अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर दिसंबर में सुनवाई करने पर भी सहमति दी है.
ट्रंप प्रशासन की स्थिति
ट्रंप प्रशासन ने अदालत में कहा कि चूंकि कुछ मूल देश अपने नागरिकों को वापस स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं, इसलिए त्वरित निर्वासन के लिए यह कदम जरूरी है। जांच रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों सहित 35 राष्ट्रों के साथ समझौते किए हैं और इस प्रक्रिया के लिए 410 मिलियन डॉलर का फंड रखा है.
डेमोक्रेटिक सांसदों की प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कांग्रेस से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा जांच के प्रवासियों को किसी अनजान देश में भेजना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
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