सुपौल में विधिक जागरूकता : ग्रामीणों को मिला कानून का सहारा
सुपौल में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम ने ग्रामीणों को कानून के करीब लाया। लोक अदालत और मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि वे लोक अदालत की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं और सुलहनीय मामलों को आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त करा सकते हैं।

सौजन्य से:- prabhatkhabar.com
सुपौल में ग्रामीणों को मिला कानून का सहारा, लोक अदालत से ले मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों तक दी गयी जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद लोग. | प्रभात खबर नेटवर्क
सुपाल कानूनी जागरूकता : सुपौल में आयोजित विधिक जागरूकता कार्यक्रम ने ग्रामीणों को कानून के करीब लाया। 12 सितंबर की राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलहनीय मामलों के त्वरित निपटारे की जानकारी दी गई। साथ ही, मानसिक बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों और एन. ए. एल. एस. ए. की 2024 की योजना के बारे में विस्तार से समझाया गया।
सुपाल कानूनी जागरूकता : बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के आदेश और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के प्रभारी सचिव मो. अफजल आलम के निर्देश पर बंजारन टोला, वार्ड संख्या 19 में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता और पारा विधिक स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत, 12 सितंबर 2026 के संबंध में विस्तार से जानकारी दी. साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण यानी एन. ए. एल. एस. ए. की ‘मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाएं योजना, 2024’ के बारे में भी जागरूक किया गया.
12 सितंबर की लोक अदालत में समझौते से निपटेंगे मामले
कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विभिन्न प्रकार के सुलहनीय मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर त्वरित एवं सरल तरीके से निष्पादन कराया जा सकता है. इससे लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिल सकती है. ग्रामीणों से अपील की गयी कि वे लोक अदालत की सुविधा का लाभ उठाएं और सुलहनीय मामलों को आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त कराने का प्रयास करें.
मानसिक बीमारी से जुड़े लोगों के अधिकारों पर जोर
जागरूकता कार्यक्रम में मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता से ग्रसित लोगों के अधिकारों को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गयी. ग्रामीणों को बताया गया कि एन. ए. एल. एस. ए. की वर्ष 2024 की योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को नि:शुल्क, संवेदनशील और प्रभावी कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि न्याय तक पहुंचने में उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो.
पुलिस जांच से कोर्ट की सुनवाई तक मिलेगी मदद
बताया गया कि योजना के तहत पैनल अधिवक्ता, एलएडीसी और पारा विधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को नि:शुल्क कानूनी सलाह और सहायता दी जाती है. जरूरत पड़ने पर पुलिस जांच से लेकर न्यायालय में सुनवाई तक कानूनी सहयोग उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा पात्र लोगों को विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहायता की जाती है.
घर तक पहुंचेगी कानूनी सहायता
कार्यक्रम में ग्रामीणों को बताया गया कि जो लोग विधिक सेवा क्लीनिक तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए गृह भ्रमण के माध्यम से कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानूनों और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए गांवों, अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों में जागरूकता शिविर आयोजित किये जाने की जानकारी भी दी गयी.
15100 पर मिलेगी नि:शुल्क कानूनी सहायता
उपस्थित ग्रामीणों को बताया गया कि जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क किया जा सकता है. कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पारा विधिक स्वयंसेवक मो. निजाम और मो. सज्जाद समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष और महिलाएं मौजूद रहे.
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लेखक के बारे में
के द्वारा राजीव कुमार झा
राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.
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