सुप्रीम कोर्ट ने कहा- छात्रों पर कठोर कार्रवाई नहीं, उन्हें समझाना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर कठोर कार्रवाई करने से मना किया है. कोर्ट ने कहा है कि युवाओं को समझाना और सही सलाह देना चाहिए। उन्हें आक्रामक कार्रवाई से बचाना चाहिए, क्योंकि इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

सौजन्य से:- ABP News
छात्रों पर कठोर कार्रवाई के पक्ष में नहीं सुप्रीम कोर्ट, कहा- 'उन्हें समझाना चाहिए'
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर कठोर कार्रवाई करने से मना किया है. कोर्ट का कहना है कि युवाओं को समझाना और सही सलाह देना चाहिए.
छात्र प्रदर्शन से जुड़े उपद्रव के मामलों को किसी राजनीतिक समझौते के आधार पर वापस लेने का एक याचिकाकर्ता ने विरोध किया है. याचिका में आयोजकों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है. कोर्ट ने कहा है कि वह छात्र प्रदर्शन मामले पर लंबित दूसरी याचिकाओं के साथ इस याचिका पर भी सुनवाई करेगा.
याचिकाकर्ता मनीष सोलंकी की तरफ से पेश वकील सैयद रिजवान अहमद का कहना था कि सरकार और पुलिस की ज़िम्मेदारी की बात हो रही है, लेकिन आयोजकों के साथ उदारता क्यों बरती जा रही है? उन्होंने पुलिस को दिया गया वादा तोड़ा. संसद की तरफ उग्र भीड़ को भेजा. अगर उस दिन 500 उग्र लोग भी लोकतंत्र के मंदिर में घुस जाते तो क्या होता? पुलिस को फायरिंग करनी पड़ती और हालात बिगड़ जाते.
क्यों बरती जा रही है नर्मी
सैयद रिजवान ने कहा कि इतना सब कुछ होने के बाद भी 'संसद चलो' मार्च के आयोजकों के प्रति नर्मी बरती जा रही है. वह लोग आज भी आराम से भड़काने वाले बयान दे रहे हैं. वह स्थिति शांत करने की कोशिश नहीं कर रहे. आयोजकों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. इस पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह छात्रों पर कठोर कार्रवाई के पक्ष में नहीं हैं. युवाओं को समझाना और सही सलाह देना चाहिए. आक्रामक कार्रवाई स्थिति को और बिगाड़ सकती है.
अहमद ने कहा कि पत्थरबाजी और हिंसा में शामिल लोगों को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ा जा सकता कि सरकार दबाव में है. इससे गलत परंपरा स्थापित होगी. छात्रों पर सख्त कार्रवाई कोई नहीं चाहता. लेकिन पुलिस या सुरक्षा बलों के बारे में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों की पहचान होनी चाहिए. उनसे सामुदायिक सेवा करवा कर गलती सुधारने का मौका दिया जाए.
सुनवाई के अंत में कोर्ट ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा मौका देगा. इस याचिका को मामले में लंबित दूसरी याचिकाओं के साथ जोड़ा जा रहा है. भविष्य में होने वाली सुनवाई में वह भी अपनी बात रखें.
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