आरोपपत्र के दस्तावेज आरोपी को उपलब्ध कराना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
आरोपपत्र के दस्तावेज आरोपी को उपलब्ध कराना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपपत्र का हिस्सा रहे दस्तावेजों तक आरोपी की पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को गोपनी…

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
आरोपपत्र के दस्तावेज आरोपी को उपलब्ध कराना जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपपत्र का हिस्सा रहे दस्तावेजों तक आरोपी की पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को गोपनीय दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का आदेश दिया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित हैं। हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी आरोपी को आरोपपत्र का हिस्सा रहे दस्तावेजों तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसा करने से आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर की पीठ ने की। पीठ ने निर्देश दिया कि 1923 के शासकीय गोपनीयता अधिनियम के तहत 2007 में दर्ज एक मामले में मुकदमे का सामना कर रहे सेवानिवृत्त मेजर जनरल वीके सिंह को कुछ अत्यंत गोपनीय दस्तावेजों की टाइप की हुई प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई का मामला यह नहीं है कि सिंह द्वारा मांगे गए दस्तावेज मुकदमे के लिए अप्रासंगिक हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की एकमात्र आपत्ति यह थी कि ये दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत गोपनीय हैं और उनकी प्रतियां उपलब्ध कराने पर उनके सार्वजनिक होने की आशंका है। सिंह देश की खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी भी रह चुके हैं। पीठ ने 18 मई के अपने आदेश में कहा कि यह स्थापित कानून है कि किसी आरोपी को आरोपपत्र का हिस्सा बने दस्तावेजों, जिनमें सामान्य डायरी के दस्तावेज भी शामिल हैं, तक पहुंच से वंचित नहीं किया जा सकता। सीबीआई ने सितंबर 2007 में सिंह के खिलाफ एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उन्होंने अपनी पुस्तक 'इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलीजेंस- सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग' प्रकाशित कर गोपनीय जानकारी का खुलासा किया。
हाईकोर्ट का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें सिंह ने गत सितंबर में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के दिसंबर 2009 के उस आदेश में संशोधन किया था, जिसमें अभियोजन पक्ष को सिंह द्वारा मांगे गए दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। सिंह ने सीआरपीसी की धारा 207 के तहत अधीनस्थ अदालत में आवेदन दाखिल कर अभियोजन पक्ष को कुछ ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया था, जो आरोपपत्र का हिस्सा थे, लेकिन उन्हें नहीं दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।
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