फरार आरोपी पर हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल नहीं
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फरार आरोपी के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि फरार आरोपी के खिलाफ हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं दाखिल की जा सकती है, अगर उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई चल रही है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Allahabad High Court Decision: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फरार आरोपी के मामले में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के मामले को अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता है।
हाइलाइट्स
हाई कोर्ट में दायर की गई थी याचिका
युवक के ससुराल में बंदी बनाने का आरोप
सुनवाई के क्रम में फरार होने का मामला
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के क्रम में बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ किया है अगर कोई व्यक्ति किसी आपराधिक मामले में फरार चल रहा है। उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई चल रही है। ऐसे में उसे अवैध हिरासत में मानते हुए हैबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका नहीं दाखिल की जा सकती है। दरअसज, एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी की। उन्होंने एक मां की ओर से दायर की गई हैबियस कॉर्पस याचिका को इसके साथ ही खारिज कर दी।
क्या है मामला?
मामला महिला ओमवती की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका का है। इसमें याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उनका 35 वर्षीय बेटा अपनी पत्नी सोना और उसके परिजनों की अवैध हिरासत में है। इस मामले में राजस्थान के धौलपुर जिले के मनिया थाने में 18 फरवरी 2026 को अपहरण समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले में पुलिस मनीष का पता नहीं लगा सकी। आरोपियों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सरकार की ओर से मामले में दाखिल जवाब में साफ किया गया कि यह मामला अवैध हिरासत का नहीं है। यह वैवाहिक विवाद का मामला है।
सरकारी वकील ने कोर्ट में कहा कि मामले में मनीष और उसके परिजनों पर पत्नी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। 16 दिसंबर 2025 को आगरा के शमशाबाद थाने में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मनीष और उसके परिजनों पर केस दर्ज कराया गया। इसमें दो लाख रुपये दहेज मांगने, शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न और घर से निकालने के आरोप लगाए गए हैं। मनीष के रिश्तेदारों पर पत्नी ने छेड़खानी और अन्य आरोप लगाए। मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए मनीष के फरार होने की बात सामने आई है।
पुलिस कर रही तलाश
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि जांच अधिकारी ने मनीष की तलाश और गिरफ्तारी के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने की कार्रवाई की गई है। जांच पूरी होने के बाद मनीष और उसकी मां ओमवती के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में यह मानने का कोई आधार नहीं है कि मनीष अपनी पत्नी या उसके परिजनों की अवैध हिरासत में है।
हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों के साथ-साथ इलाहाबाद, मद्रास और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि हैबियस कॉर्पस रिट तभी सुनवाई योग्य होती है, जब पहली नजर में यह साबित हो कि संबंधित व्यक्ति किसी की गैरकानूनी या अवैध हिरासत में है।
लेखक के बारे मेंराहुल पराशरराहुल पराशर नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। वे नवभारत टाइम्स की यूपी-उत्तराखंड टीम में काम करते हैं। प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल पत्रकारिता में उनका 22 साल लंबा का अनुभव है, जिसमें उन्होंने रिपोर्टर और डेस्क पर विभिन्न भूमिकाओं में काम किया है। राहुल पराशर ने अक्टूबर 2021 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जॉइन किया था। उन्होंने पिछले 4 वर्षों में यूपी विधानसभा चुनाव, यूपी निकाय चुनाव, उत्तराखंड विधानसभा चुनाव, यूपी में एसआईआर प्रक्रिया जैसे बड़े घटनाक्रम का विस्तृत कवरेज किया है। राजनीति गतिविधियों से लेकर प्रशासनिक हलचल और क्राइम की घटनाओं पर उनका फोकस रहता है।
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राहुल पराशर ने साल 2004 में प्रभात खबर, पटना से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में जूनियर रिपोर्टर से लेकर प्रधान संवाददाता के पद पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा, राजद, जदयू और लोजपा जैसे दलों को कवर किया। उन्होंने शिक्षा विभाग की लंबे समय तक रिपोर्टिंग की। नवभारत टाइम्स वेबसाइट में काम करते हुए शानदार कवरेज के लिए कई बार संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा:
राहुल पराशर ने वर्ष 2004 में भारतीय विद्या भवन के पीके इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से जर्नलिज्म का कोर्स किया है। मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर से आने वाले राहुल पराशर ने नेतरहाट, झारखंड से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर से वर्ष 2002 में स्नातक की डिग्री हासिल की है।... और पढ़ें
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