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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कड़ी फटकार, CBI को जांच सौंपने का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को एक सड़क दुर्घटना में FIR न दर्ज करने के कारण कड़ी निंदा की और सभी आपराधिक मामलों की जांच CBI को सौंपने का आग्रह किया। कोर्ट ने बताया कि यदि पुलिस एजेंडा के आधार पर काम करती रहे तो जनता का भरोसा नहीं बना रहेगा, और संबंधित अधिकारी को अदालत में साफ़‑साफ़ जवाब देने का आदेश दिया।

1 अक्टूबर 2026 को 05:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस की कड़ी फटकार, CBI को जांच सौंपने का प्रस्ताव

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पुलिस को जोरदार फटकार लगाई है। यह एक दुर्घटना का मामला था जिसमें यूपी पुलिस पर एक्शन नहीं लेने का आरोप लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सीबीआई तक को देने की बात कह दी और कहा कि किसी राज्य की पुलिस को एजेंडे के तहत काम नहीं करना चाहिए।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को फटकार लगाई। मामला एक सड़क दुर्घटना का था, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोपी को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था, फिर भी पुलिस ने उसका नाम दर्ज नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य की पुलिस किसी एजेंडे के तहत काम करती है और मामलों को दबाने की कोशिश करती है, तो बेहतर होगा कि सभी आपराधिक मामलों की जांच CBI को सौंप दी जाए।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने सवाल किया कि पुलिस के कामकाज को देखते हुए क्यों न राज्य पुलिस को ही भंग कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि हर मामले में आपका कोई न कोई एजेंडा होता है। अगर आप मामलों को इस तरह से संभालेंगे तो लोग आप पर भरोसा कैसे करेंगे? बेहतर होगा कि हम UP पुलिस की सभी जांचों में CBI को शामिल करने के लिए कहें। इससे तो अच्छा है कि हम UP पुलिस को ही भंग कर दें। यह सब बकवास कहीं तो रुकनी ही चाहिए।

लोग पुलिस पर कैसे भरोसा करेंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलंदशहर के खुर्जा के सर्कल ऑफिसर शोभित कुमार ने जो हलफनामा दाखिल किया था। जिसमें उनसे सफाई मांगी गई थी वह बिल्कुल भी प्रभावशाली नहीं था। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन करना एक बात है, लेकिन उनके सामने झुक जाना या गलत काम को छिपाना दूसरी बात है। और इस तरह की लीपापोती तो जितना कम कहा जाए, उतना ही अच्छा है। कोर्ट ने अधिकारी को अपने बर्ताव पर सफाई देने के लिए अदालत में पेश होने का आदेश दिया।

बेंच ने अपने आदेश में क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा, "उक्त अधिकारी को अगली तारीख पर कोर्ट में पेश होकर इस बारे में सफाई देनी होगी। उनके पास एक बेहतर हलफनामा दाखिल करने का विकल्प होगा, जिसमें यह बताया जाए कि 19 अगस्त को एक अज्ञात मोटरसाइकिल सवार के खिलाफ FIR नंबर 195/2026 क्यों दर्ज की गई थी, जबकि यह बात मानी जा चुकी है कि उस सवार को मौके पर ही पकड़ लिया गया था। पहले बताए गए हलफनामे के पैराग्राफ 6 में मोटरसाइकिल सवार का नाम तुषार (पिता प्रेमपाल) बताया गया है। शुरुआत में FIR में नाम खाली क्यों छोड़ा गया था और बाद में उसे क्यों जोड़ा गया, इस बात का स्पष्टीकरण देना जरूरी है।"

लेखक के बारे मेंSanjeev Kumarसंजीव कुमार (सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर)

संजीव कुमार वर्तमान में नवभारत टाइम्स में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वे मई 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। पत्रकारिता में ऑनलाइन न्यूज डेस्क पर उन्हें काम करने का 6 साल का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह अमर उजाला, वन इंडिया हिंदी और दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में सेवा दे चुके हैं। वह वर्तमान में नवभारत टाइम्स में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। खबरों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए स्रोतों की जांच के साथ तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य रूप से करते हैं।

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संजीव कुमार ने पत्रकारिता में स्नातक और मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया, यहां उन्होंने हेडलाइन, ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, स्पेशल खबरों को यूजर के इंटरेस्ट के अनुसार बनाने के तरीके को बारीकी से समझा। इसके बाद उन्होंने वन इंडिया हिंदी में नेशनल डेस्क पर काम किया। फिर दैनिक जागरण में बिहार-झारखंड की लोकल खबरों पर 1 साल 6 महीने तक काम किया है। इसके बाद नवभारत टाइम्स में पारी की शुरुआत की।

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मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले संजीव कुमार ने वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से बैचेलर इन मीडिया साइंस में स्नातक किया। फिर आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी से मास्टर इन मीडिया बिजनेस मैनेजमेंट की भी डिग्री ली। इसके अलावा उन्होंने मीडिया से संबंधित कई ऑनलाइन कोर्स भी किए हैं।... और पढ़ें

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