हाईकोर्ट ने निचली अदालतों की सुस्ती पर फटकार, 40 साल तक चलते मुकदमों को संस्थागत विफलता कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में लंबित मामलों की देरी और जानकारी न देने की निंदा की, कई कड़े निर्देश जारी किए। 16 साल में 178 सुनवाईयों वाले उर्मिला मिश्रा केस सहित कई मामलों में अनसुलझी सुनवाईयों का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने जमानत प्रक्रिया में लापरवाही पर फटकार लगाते हुए रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण का आदेश भी दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
हाईकोर्ट ने निचली अदालतों की सुस्ती पर जताया ऐतराज, कहा- "40 साल तक मुकदमे चलना संस्थागत विफलता का सबूत"
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में मुकदमों के निस्तारण में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए सख्त निर्देश दिए हैं.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 30, 2026 at 10:41 PM IST
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों में मुकदमों के निस्तारण में हो रही देरी और जानकारी न देने के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने चार अलग-अलग मामलों पर सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि यह सुस्ती किसी एक व्यक्ति का दोष नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवहार की विफलता है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 20 साल तक आरोप तय न होना और मुकदमों का 40 साल तक खिंचना न्याय व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है. इस पूरी स्थिति पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कई कड़े निर्देश जारी किए हैं.
16 साल में 178 तारीखें फिर भी तय नहीं हुए आरोप, सामने आए हैरान करने वाले मामले: अदालत के सामने ऐसे कई चौंकाने वाले मामले आए जहाँ न्याय में अत्यधिक देरी देखने को मिली. प्रयागराज के नैनी थाने का साल 2009 का उर्मिला मिश्रा का मामला 16 साल में 178 से ज्यादा बार लगा, लेकिन आरोप तय नहीं हो सके. वहीं 2008 का सरफराज अहमद का मामला भी 143 तारीखें लगने के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका. इसके अलावा वीएस पालीट्यूब का महज 59,000 रुपये का चेक बाउंस केस 100 से ज्यादा बार सूचीबद्ध होने के बाद भी आरोपी की गैरहाजिरी के कारण अटका रहा.
जमानत प्रक्रिया में ढिलाई और रिपोर्ट न भेजने पर जिलों को लगाई फटकार: हाईकोर्ट ने पूर्व में तय की गई जमानत प्रक्रिया के पालन न होने पर भी गहरी नाराजगी जताई. अगस्त 2025 के बाद भी हजारों मामलों में नियम के विपरीत दो-दो जमानतदार मांगे जाते रहे. इस लापरवाही पर जब प्रदेश के सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई, तो केवल 25 जिलों ने ही बेहद अधूरा जवाब भेजा. हालांकि कोर्ट ने आगरा जिला जज की समयबद्ध रिपोर्ट की सराहना की और अन्य जिलों की हीलाहवाली पर सख्त नाराजगी दर्ज कराई.
आरोपी के न आने पर पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई, चीफ जस्टिस से फुल कोर्ट का अनुरोध: हाईकोर्ट ने उर्मिला मिश्रा और सरफराज के मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के सख्त निर्देश दिए हैं. पालीट्यूब मामले में कोर्ट ने कानपुर नगर के एसएसपी को आदेश दिया है कि अगर आरोपी पेश न हो तो उसे हिरासत में लेकर ट्रायल पूरा कराया जाए. इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश से फुल कोर्ट बुलाने और हाईकोर्ट रूल्स का कड़ाई से पालन कराने पर विचार करने की अपील की है. अदालत ने फैसले की कॉपी केंद्रीय विधि मंत्रालय को भेजने और सभी अदालती रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण का निर्देश भी जारी किया है.
यह भी पढ़ें- हमीरपुर में 8 साल पुराने मर्डर केस में फैसला: सो रहे व्यक्ति की हत्या में पिता-पुत्र को उम्रकैद
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