छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिना पत्नी की सुनवाई के एकतरफा तलाक को रद्द किया
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें पत्नी को उचित नोटिस दिए बिना तलाक की डिक्री जारी की गई थी, क्योंकि प्रक्रिया में कानूनी मानदंडों का उल्लंघन हुआ था। अब तलाक की डिक्री को नई सुनवाई के बाद तय किया जाएगा और दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को कोर्ट में उपस्थित होना अनिवार्य किया गया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
पत्नी की उपस्थिति के बिना तलाक कानून की प्रक्रिया के खिलाफ: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
फैमिली कोर्ट का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द किया. तलाक की डिक्री रद्द करने की पत्नी की अर्जी पर नए सिरे से फैसला होगा.
By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : October 5, 2026 at 9:22 AM IST
बिलासपुर: फैमिली कोर्ट ने तलाक के मामले में पत्नी को समुचित तरीके से नोटिस दिए बिना एकतरफा फैसला सुना दिया. हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इसे कानून की प्रक्रिया के खिलाफ माना है. जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डीबी ने कहा कि किसी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश नहीं दिया जा सकता. कोर्ट ने आगे कहा कि एकतरफा फैसले के लिए अखबार में नोटिस प्रकाशित करना अंतिम उपाय है. इससे पहले सामान्य तरीके से नोटिस देने और घर पर चस्पा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
सूरजपुर निवासी महिला के पति ने 9 जनवरी 2024 को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का केस फैमिली कोर्ट में पेश किया था. फैमिली कोर्ट ने पत्नी के दिए पते पर पंजीकृत डाक से नोटिस भेजा, लेकिन नोटिस सही पता नहीं होने के कारण वापस आ गया. इसके बाद पति ने अखबार में नोटिस प्रकाशित कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया. 29 फरवरी 2024 को स्थानीय अखबार में नोटिस प्रकाशित हुआ.
पत्नी का कहना था कि उसे तलाक की कार्यवाही की जानकारी नहीं थी. उसे 18 नवंबर 2024 को औरंगाबाद में चल रहे भरण-पोषण के मामले की काउंसलिंग के दौरान तलाक की डिक्री की कॉपी दिखाई गई. इसके बाद उसने प्रमाणित प्रति हासिल की और 2 दिसंबर 2024 को एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की अर्जी दायर की. पारिवारिक न्यायालय ने 25 अप्रैल, 2024 को पारित एकतरफा तलाक के फैसले को रद्द करने के लिए याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ करने की महिला की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की.
हाई कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 5 के नियम 17 और 20 का हवाला देते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट ने केवल एक बार नोटिस वापस आने के बाद सीधे अखबार में प्रकाशन का आदेश दे दिया. रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रयास नहीं दिखा कि पत्नी के घर पर नोटिस चस्पा कराया गया हो. फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि पत्नी जानबूझकर नोटिस से बच रही है, जबकि रिकॉर्ड में ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था. प्रक्रिया पूरी किए बगैर अखबार में नोटिस दे दिया गया, जबकि यह अंतिम उपाय था.
हाईकोर्ट ने पत्नी की देरी माफ करने की अर्जी मंजूर करते हुए फैमिली कोर्ट का 23 जून 2025 का आदेश रद्द कर दिया. अब एकतरफा तलाक की डिक्री रद्द करने की पत्नी की अर्जी पर फैमिली कोर्ट नए सिरे से फैसला करेगा. हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को 12 अक्टूबर को फैमिली कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
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