मुजफ्फरपुर अदालत ने तेजस्वी यादव‑मुकेश सहनी को ‘नाव’ चुनाव चिह्न के दुरुपयोग पर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया
भारतीय सार्थक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर कुमार ओजा के दावे के तहत तेजस्वी प्रसाद यादव और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी पर ‘नाव’ चुनाव चिह्न के अनुचित प्रयोग का केस फिर से शुरू किया गया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने पहले के सीजेएम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर निचली अदालत को शपथ बयान और संभावित एमपी‑एमएलए कोर्ट में स्थानांतरण सहित तीन महीने के भीतर कार्यवाही करने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- ETV Bharat
नाव चुनाव चिह्न विवाद में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी को राहत नहीं, परिवाद खारिज करने का आदेश रद्द
मुजफ्फरपुर जिला अदालत ने 'नाव चुनाव चिह्न' के कथित दुरुपयोग मामले में तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी पर दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है. रिपोर्ट-विवेक
Published : October 9, 2026 at 10:04 AM IST
मुजफ्फरपुर: 'नाव' चुनाव चिह्न के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी और संतोष सहनी की कानूनी मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं. मुजफ्फरपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-11 डॉ. किशोर कुणाल की अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा इस परिवाद को खारिज करने के पुराने आदेश को रद्द कर दिया है. इसके साथ ही सत्र अदालत ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए निचली अदालत में भेजने का निर्देश दिया है.
नाव चुनाव चिह्न के कथित दुरुपयोग मामले में बढ़ने वाली है मुश्किलें
यह पूरा मामला 'भारतीय सार्थक पार्टी' के बिहार प्रदेश अध्यक्ष 'सुधीर कुमार ओझा' द्वारा दर्ज कराए गए एक परिवाद से जुड़ा है. सुधीर कुमार ओझा का आरोप है कि निर्वाचन आयोग द्वारा उनकी पार्टी को आवंटित किए गए 'नाव' चुनाव चिह्न का महागठबंधन के कार्यक्रमों, बैनर और पोस्टरों में कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया. परिवादी ने ईटीवी भारत को बताया कि 31 मार्च 2024 को भी इस प्रतीक का इस्तेमाल करते हुए एक राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये थे, जिससे उनकी पार्टी को भारी आर्थिक और राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा.
"2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी ने चुनाव आयोग द्वारा नाव चुनाव चिह्न जब्त करने के बाद भी उन्होंने उसका इस्तेमाल कर दुरूपयोग किया जिसके खिलाफ मेरे द्वारा दाखिल की गई याचिका को सत्र अदालत ने स्वीकर कर पूर्व में निचली अदालत के परिवाद खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया. अब इस मामले में दोनों के खिलाफ अदालत में सुनवाई होगी."- सुधीर कुमार ओझा, परिवादी एवं भारतीय सार्थक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष
कोर्ट ने पहले किया था परिवाद खारिज
इससे पहले, 20 जनवरी 2025 को सीजेएम कोर्ट ने इस परिवाद को खारिज कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ सुधीर कुमार ओझा ने अपने अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता के माध्यम से जिला अदालत में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी. सत्र अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए सीजेएम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया.
पहले आदेश को रद्द कर निचली अदालत को सुनवाई के निर्देश
अदालत ने अब निर्देश दिया है कि शिकायतकर्ता का शपथ पर बयान दर्ज किया जाना अनिवार्य है. इसके लिए परिवादी सुधीर कुमार ओझा को 29 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही सत्र न्यायालय ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया है.
एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर हो सकता है केस
कोर्ट ने कहा है कि पहले यह जांच की जाए कि आरोपितों में से कोई वर्तमान या पूर्व सांसद अथवा विधायक है या नहीं. यदि यह मामला एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो इसे तुरंत संबंधित विशेष अदालत में स्थानांतरित किया जाए. यदि ऐसा नहीं होता है, तो निचली अदालत को तीन महीने के भीतर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है.
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