सुप्रीम कोर्ट में सोनम रघुवंशी केस में बड़ी बेंच की जरूरत, 14 जुलाई को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की ओर से सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने की अपील पर अदालत ने बड़ी बेंच की जरूरत की ओर इशारा किया। सोनम रघुवंशी पति की हत्या के मुख्य आरोपी हैं और उन्हें मेघालय हाई कोर्ट से जमानत मिली है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की ओर से सोनम रघुवंशी को जमानत दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। लाइवलॉ के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने इस मामले के कानूनी पहलुओं पर गौर करने के लिए बड़ी बेंच की जरूरत की ओर इशारा किया है।
सोनम रघुवंशी पति की हत्या की आरोपी है
- मेघालय के 2025 के राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में उसी की पत्नी सोनम रघुवंशी मुख्य आरोपी है।
- सोनम रघुवंशी पर हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है।
- सोनम रघुवंशी को इस मामले में निचली अदालत, मेघालय हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उसपर रोक लगाने से मना किया है।
- लेकिन, इतने संगीन अपराध में मुख्य आरोपी को सिर्फ तकनीकी आधार पर आसानी से जमानत मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
समस्या ये है कि दो जजमेंट हैं- सुप्रीम कोर्ट
- इस मामले में सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की ओर से केस की पैरवी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें ही अपने विचार से अवगत कराया है।
- जस्टिस मनोज मिश्रा ने सॉलिसिटर जनरल की ओर इशारा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग बेंच ने इस कानूनी मुद्दे पर विरोधाभासी फैसले दिए हैं।
- जज ने अदालत में जमानत के मामले में ऐसे केसों का जिक्र किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग बेंच ने अलग-अलग फैसले दिए हैं।
- किसी में गिरफ्तारी का लिखित कारण बताना अनिवार्य बताया गया तो किसी में इसे अनिवार्य नहीं कहा गया। कुछ में बिना लिखित आधार दिए ही बेल की मंजूरी दे दी गई।
टाइपिंग की गलती से जमानत दी गई- सरकार
- सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि जहां तक इस केस से जुड़े तथ्य का सवाल है तो आरोपी को गिरफ्तारी से संबंधित लिखित आधार उपलब्ध करवाए गए। लेकिन, टाइपिंग की गलती से बीएनएस की धारा 103 की जगह बीएनएस की धारा 403 (ये धारा है ही नहीं) दर्ज हो गया।
- सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को सिर्फ इस आधार पर जमानत दे दी गई कि टाइपिंग की गलती गिरफ्तारी के कारण की लिखित जानकारी नहीं देने के समान है।
- इसपर जस्टिस मिश्रा ने कहा कि 'यह सिर्फ धारा को शामिल करने की बात नहीं है..आपको यह भी बताना है कि आप अपने पति की हत्या में शामिल हैं...।'
सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को फिर करेगा सुनवाई
- सुप्रीम कोर्ट ने केस की गंभीरता को देखते हुए इसपर मंगलवार को फिर से सुनवाई की बात कही।
- इसके साथ ही मेघालय सरकार से कहा गया है कि आरोपी को जो मूल दस्तावेज दिए गए थे, उसकी कॉपी भी जमा करे।
- इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच ने सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से मना कर दिया था।
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