वाराणसी अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका निरस्त की
वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अदालत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी है। यह याचिका अमेरिका में सिखों की ओर से दिये गए अपने एक बयान को लेकर दाखिल की गई थी। अदालत ने इस याचिका को न्यायोचित, तर्कसंगत और विधिसम्मत बताया है, जिसमें हस्तक्षेप करना न्यायोचित नहीं है।

सौजन्य से:- Jagran
वाराणसी की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ लंबित पुनरीक्षण याचिका निरस्त, चर्चा में है इस मामले में अदालत की टिप्पणी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ वाराणसी की विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) अदालत ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है। यह याचिका अमेरिका में सिखों को ल ...और पढ़ें
HighLights
- राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका खारिज हुई।
- अदालत ने याचिका को बलहीन और निरस्त योग्य बताया।
- यह मामला सिखों पर राहुल के बयान से जुड़ा था।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। अमेरिका यात्रा के दौरान भारत में रह रहे सिखों को लेकर दिए गए बयान के मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका को विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने निरस्त कर दी।अदालत ने बहस सुनने के बाद पुनरीक्षण याचिका पर आदेश के लिए नौ जुलाई की तिथि मुकर्रर की थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए) द्वारा पारित आदेश तथ्य एवं विधि दोनों की दृष्टि से न्यायोचित, तर्कसंगत एवं विधिसम्मत है जिसमें हस्तक्षेप करना न्यायोचित नहीं है। निगरानी याचिका बलहीन है और निरस्त होने योग्य है।
आशापुर (सारनाथ) निवासी पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्र ने सितंबर 2024 में अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए बयान को लेकर 26 सितंबर 2024 को अदालत में प्रार्थना पत्र दिया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) एमपी-एमएलए नीरज कुमार त्रिपाठी ने 28 नवंबर 2024 को इस प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था।
इस आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्र ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की। विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने सुनवाई बाद 21 जुलाई 2025 को पुनरीक्षण याचिका मंजूर कर ली और प्रार्थना पत्र पर फिर से सुनवाई करने का अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) एमपी-एमएलए को आदेश दिया।
खबरें और भी
इससे असंतुष्ट कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा 26 अगस्त 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई बाद 26 सितंबर 2025 को राहुल गांधी की याचिका को निरस्त कर दिया। तत्पश्चात् इस लंबित प्रार्थना पत्र पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए) की अदालत में फिर से सुनवाई हुई थी।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए) नीरज कुमार त्रिपाठी ने 17 अक्टूबर 2025 को प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्र ने पुनः पुनरीक्षण याचिका दायर की जिसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में चल रही थी।
वहीं भगवान राम को लेकर कथित विवादित बयान को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए) नीरज कुमार त्रिपाठी की अदालत में सुनवाई हुई। प्रतिवादी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय की ओर से अधिवक्ता अनुज यादव उपस्थित हुए।
दोनों अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखने के लिए अदालत से समय मांगा। जिस पर अदालत 24 जुलाई की तिथि मुकर्रर कर दी। अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय ने अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी में 21 अप्रैल 2025 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा भगवान श्रीराम को लेकर विवादित बयान देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट में घुड़सवारी टीम चयन विवाद: जज ने सुनवाई से खुद को किया अलग

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शो जंपिंग टीम चयन पर याचिकाओं का निपटारा किया, 2026 एशियाई खेलों में भारत की भागीदारी नहीं

सुप्रीम कोर्ट: बैंक कानूनी राय में हुई गलतियों के लिए वकीलों का नाम सावधानी सूची में नहीं डाल सकते

बैंक विलय से मकान मालिक को बेदखल करने का अधिकार खत्म नहीं होगा, जानिए क्या है सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

बीसीआई ने शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत किया, राष्ट्रीय कानूनी अकादमी की स्थापना का प्रस्ताव रखा

पत्नी को अपनी जिंदगी जीने का अधिकार, हैबियस कॉर्पस से नहीं मिलेगी वापस

दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला: वेदांता और राव्वा ऑयल को मिलेंगे 99 मिलियन डॉलर

महोदय एक: भारतीय नागरिकता के परिभाषा की जदओं का पेचीदा सवाल
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट में 2026 एशियाई खेलों की ड्रेसेज टीम चयन पर सुनवाई
- उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त रुख: स्ट्रीट डॉग्स के आतंक पर जवाब दें मुख्य सचिव
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलेख: बीसीआई निर्धारित कार्य समूहों के गठन की योजना बना रहा है
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को अपनी अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं का ऑडिट करने के लिए कदम उठाना होगा
- वकीलों के लिए नियमों में बदलाव: बीसीआई ने लागू किए कानूनी अकादमी के राष्ट्रीय स्तर के फैसले के मायने
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया राज्य बार काउंसिल की अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं का ऑडिट करेगी BCI
- बीसीआई अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए पैनल बनाएगी
- टाइपिंग एरर पर जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय सरकार को रिकॉर्ड लाने का निर्देश दिया

