ममता बनर्जी को कोर्ट से बड़ी राहत, टीएमसी के बैंक खातों पर लगी रोक हुई हटी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता गुट के टीएमसी को बड़ी राहत देते हुए उसके फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों के सीमित संचालन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया। कोर्ट ने कहा कि पार्टी अब अपने रोजमर्रा के संचालन और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही कर सकेगी।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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ममता को कोर्ट से राहत: पार्टी के तीनों खातों से पैसा निकाल सकेगी TMC, जानें बंगाल में अंडेबाजी पर क्या कहा?
Thu, 09 Jul 2026 02:50 PM IST
प्रशांत तिवारी
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 09 Jul 2026 02:50 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता गुट के टीएमसी को बड़ी राहत देते हुए उसके फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों के सीमित संचालन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, पूर्व मंत्री अरूप विश्वास पर अदालत परिसर में अंडे फेंकने के मामले में अदालत ने कहा कि आरोपियों की सार्वजनिक बेइज्जती जैसी प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को दो बड़े घटनाक्रम सामने आए। एक ओर कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गुट वाले तृणमूल कांग्रेस को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों के संचालन के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त कर दिया, वहीं दूसरी ओर अदालत ने पूर्व मंत्री अरूप विश्वास पर अदालत परिसर में कथित अंडे फेंकने की घटना पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों की सार्वजनिक बेइज्जती और उन पर अंडे फेंकने जैसी प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए।
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विशेष अधिकारी क्यों नियुक्त किया गया?
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने रिटायर्ड जज जस्टिस सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक विशेष अधिकारी नियुक्त किया। अदालत ने तय किया कि उनकी निगरानी में ही TMC अपने फ्रीज किए गए बैंक खातों का सीमित इस्तेमाल कर सकेगी।
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क्या पार्टी अब बैंक खातों से मनचाहा खर्च कर सकेगी?
बिल्कुल नहीं। अदालत ने साफ कर दिया कि खातों से सिर्फ पार्टी के रोजमर्रा के संचालन और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा, 'स्पेशल ऑफिसर किसी भी अन्य बड़े या छोटे खर्च की अनुमति नहीं देंगे।' हालांकि राज्य सरकार ने कानूनी खर्चों के लिए रकम निकालने का विरोध किया, लेकिन अदालत ने इसकी भी इजाजत दे दी।
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किस वजह से अदालत ने दिया यह फैसला?
बागी विधायक विश्वनाथ दास ने अदालत में दलील दी थी कि यदि TMC को सीधे बैंक खाते संचालित करने की छूट मिल गई तो अहम सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के हितों की रक्षा के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति सबसे संतुलित व्यवस्था होगी।
क्या होगी पैसे निकालने की प्रक्रिया?
कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में से किसी भी दो को जरूरत पड़ने पर विशेष अधिकारी के सामने चेक पेश करना होगा। विशेष अधिकारी चेक पर काउंटर साइन करेंगे, तभी बैंक से भुगतान किया जा सकेगा।
क्या विशेष अधिकारी को भी इसी खाते से वेतन मिलेगा?
जी हां। अदालत ने निर्देश दिया कि विशेष अधिकारी को हर महीने 1.25 लाख रुपये मानदेय दिया जाएगा और यह भुगतान भी इन्हीं बैंक खातों से किया जाएगा।
आखिर TMC के बैंक खाते फ्रीज क्यों किए गए थे?
बिधाननगर पुलिस ने पार्टी फंड के कथित दुरुपयोग की शिकायत मिलने के बाद तीनों बैंक खातों को डेबिट-फ्रीज कर दिया था। यह शिकायत बागी विधायक विश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी। हालांकि TMC ने इन आरोपों को निराधार, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि इससे पार्टी का नियमित कामकाज प्रभावित हुआ है।
क्या अदालत को शिकायत में कोई ठोस आधार नजर आया?
हाईकोर्ट ने पहली नजर में ऐसा नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि शिकायत बेहद सामान्य है और उसमें किसी खास लेन-देन या घटना का स्पष्ट उल्लेख तक नहीं किया गया है। अदालत ने पूछा कि शिकायत दर्ज होने के महज अगले दिन ही बैंक खाते फ्रीज करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? अपने आदेश में अदालत ने कहा कि 18 जून को शाम 6 बजे एफआईआर दर्ज हुई और अगले ही दिन 19 जून को तीनों खातों को डेबिट-फ्रीज कर दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल उसके सामने ऐसा कोई ठोस आधार नहीं आया है, जिससे इतनी तत्काल कार्रवाई उचित साबित हो सके।
क्या अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की?
सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा, 'इतनी तेजी से सब कुछ क्यों हुआ? जब कोई गरीब नागरिक पुलिस स्टेशन जाता है तो पुलिस इतनी सक्रिय नहीं होती। लेकिन यहां शाम छह बजे शिकायत हुई और अगले ही दिन खाते फ्रीज कर दिए गए।' इस पर राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस लोगों के धन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए कार्रवाई कर रही थी। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि यदि खाते डी-फ्रीज किए गए तो TMC के दो गुटों के बीच उन्हें संचालित करने को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है।
अदालत ने 'असली TMC' के विवाद पर क्या कहा?
इस मु्द्दे पर कोर्ट ने माना कि दोनों गुट खुद को असली TMC बता रहे हैं और यह विवाद फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग के पास लंबित है। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर यह तय करना जरूरी नहीं है कि असली TMC कौन है। चुनाव आयोग के फैसले के बाद संबंधित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
ये भी पढ़ें: बारुईपुर एनकाउंटर के बाद सरकार का एक्शन: केस में CID की एंट्री; आरोपी का शव लेने से परिवार ने किया इनकार
अंडेबाजी पर कोर्ट ने क्या दिया आदेश?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व खेल मंत्री अरूप विश्वास को अंतरिम राहत देते हुए अदालत परिसर में कथित अंडे फेंकने की घटना पर भी कड़ी नाराजगी जाहिर की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि आरोपियों की सार्वजनिक परेड हो या उन पर अंडे फेंकने की घटना, इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया।
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