केंद्र व बीसीआई से जवाब मांगने के बाद भी उत्तराखंड बार काउंसिल की याचिका पर हाईकोर्ट ने कार्यवाही बंद कर दी
उत्तराखंड विधिज्ञ परिषद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बीसीआई से जवाब मांगा था। अब हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
उत्तराखंड बार काउंसिल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र से मांगा जवाब
उत्तराखंड विधिज्ञ परिषद के निर्वाचित सदस्यों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, बीसीआई से जवाब मांगा है.
By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 4, 2026 at 6:59 PM IST
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड विधिज्ञ परिषद के 10 निर्वाचित सदस्यों की उस याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) से मंगलवार को जवाब मांगा, जिसमें जुलाई के एक प्रस्ताव और परिपत्र को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि बीसीआई ने चुनाव संपन्न होने के बाद निर्वाचित राज्य विधिज्ञ परिषदों की संरचना में बदलाव कर दिया.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने उत्तराखंड राज्य विधिज्ञ परिषद के निर्वाचित सदस्यों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी की दलीलों पर संज्ञान लिया और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय तथा बीसीआई को नोटिस जारी किए.
कुलदीप कुमार और नौ अन्य निर्वाचित सदस्यों द्वारा वकील ध्रुव जोशी के माध्यम से दायर इस याचिका में बीसीआई के 19 जुलाई के प्रस्ताव और उसके परिणामस्वरूप 21 जुलाई को जारी सर्कुलर को रद्द करने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि ये उपाय अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 3(2)(बी) के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन करते हैं.
याचिका के अनुसार, उत्तराखंड राज्य विधिज्ञ परिषद के चुनाव शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत गठित एक उच्चाधिकार-प्राप्त चुनाव समिति की देखरेख में आयोजित किए गए थे. इसमें कहा गया कि चुनाव परिणाम 28 फरवरी को घोषित किए गए थे. 13 मार्च को आधिकारिक तौर पर उत्तराखंड राजपत्र में अधिसूचित किए गए थे. जिससे निर्वाचित सदस्यों को पद संभालने का वैधानिक अधिकार मिल गया.
इसमें कहा गया है कि अधिवक्ता अधिनियम की धारा 3(2)(बी) किसी राज्य विधिज्ञ परिषद के लिए अधिकतम 25 निर्वाचित सदस्यों का प्रावधान करती है, जहां मतदाता वकीलों की संख्या 10,000 से अधिक हो, याचिका में कहा गया है कि बीसीआई का बाद का प्रस्ताव, जो महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुविधाजनक बनाने के लिए ऐसे राज्यों में अधिकतम 32 सदस्यों के गठन का प्रावधान करता है, संसद द्वारा बिना किसी संशोधन या शीर्ष अदालत की विशिष्ट अनुमति के प्रभावी रूप से वैधानिक संरचना (संरचनात्मक संख्या) को बढ़ाता है.
इसमें कहा गया कि पहले से ही राजपत्र में प्रकाशित चुनाव परिणामों को संशोधित करके पुन: प्रकाशित करने का निर्देश देने वाला बीसीआई का परिपत्र, संपन्न हो चुकी चुनावी प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के समान है.
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