सरकार का बड़ा बयान: विदेशी नागरिकों को यह शर्तें पूरी करनी होंगी तो ही होगी वापसी
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि विदेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए राष्ट्रीयता का सत्यापन और उचित यात्रा दस्तावेज जरूरी है, बिना इसके वापसी संभव नहीं। सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसे अवैध प्रवासियों की आवाजाही रोकना जरूरी है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर बताया है कि किसी विदेशी नागिरक को उसके देश की मदद के बिना वापस भेजना क्यों आसान नहीं है और इसमें किस तरह की बाधाएं आती हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि किसी विदेशी नागरिक को, जिसकी नागरिकता की पुष्टि नहीं हुई है, उसे बिना उसके अपने देश की सहमति के वापस नहीं भेज सकते। सरकार का कहना है कि बिना राष्ट्रीयता सत्यापित किए निर्वासन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की जा सकती।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि किसी विदेशी नागरिक को तब तक उसके मुल्क वापस नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसका अपना देश उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि न करे और उसे स्वीकार करने के लिए तैयार न हो जाए।
विदेशी नागरिकों के निर्वासन पर केंद्र सरकार का जवाब
रिट याचिका पर सरकार का हलफनामा
लाइवलॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजुबाला दास की रिट याचिका पर यह हलफनामा दायर किया है।
यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के मार्च, 2025 के आदेश के आलोक में दायर किया गया है।
रिट याचिका में मांग की गई है कि जिसकी नागरिकता की पहचान न हो, उसे विदेशी घोषित किया जाए।
उचित यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट जरूरी
सुप्रीम कोर्ट में गृह मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा निर्वासन प्रक्रिया के तहत एक विदेशी नागरिक को आम तौर पर संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन या फॉर्नर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस डिपोर्ट कर सकता है, बशर्ते कि उसकी सजा या कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाए, उसके पास उचित यात्रा दस्तावेज या पासपोर्ट हो और कोई भी आपराधिक मामला लंबित न हो।
वापसी के लिए राष्ट्रीयता का सत्यापन जरूरी
गृह मंत्रालय के मुताबिक अगर संबंधित विदेशी नागरिक के पास कोई उचित यात्रा दस्तावेज नहीं है तो सरकार के लिए उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करने के बाद, संबंधित दूतावास या उच्चायोग के माध्यम से उसे हासिल करना जरूरी होता है।
किसी भी विदेशी नागरिक को डिपोर्ट करने से पहले, उसकी नागरिकता की पुष्टि की प्रक्रिया के माध्यम से संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से आवश्यक यात्रा दस्तावेज प्राप्त करना जरूरी है।
गृह मंत्रालय का हलफनामा
जिस भी विदेशी नागरिक की राष्ट्रीयता का पता नहीं या सत्यापित नहीं है, उसे तभी उसके देश वापस भेजा जा सकता है, जब उसकी राष्ट्रीयता सत्यापित हो जाए, उसके पास वैलिड यात्रा दस्तावेज हों और संबंधित देश उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हो। राष्ट्रीयता की पुष्टि के बिना देश से वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती।
गृह मंत्रालय का हलफनामा
'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवाजाही रोकना जरूरी'
सरकार ने कहा है कि जबतक राष्ट्रीयता सत्यापित नहीं होती और डिपोर्टेशन मुमकिन नहीं हो जाता, ऐसे अवैध प्रवासियों की कानूनी आवाजाही रोकना जरूरी है।
सरकार की दलील है कि उसे फरार होने से रोकने, राष्ट्रीय सुरक्षा और आखिरकार डिपोर्टेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
केंद्र ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीयता का सत्यापन करना विदेशी सरकारों पर निर्भर है, इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं तय की जा सकती।
ऐसी स्थिति में संबंधित विदेशी नागरिकों को निश्चित केंद्रों में रखना जरूरी है, तबतक जबतक की उसकी राष्ट्रीय तय न हो जाए और उसकी वापसी संभव न हो।
लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने'कोख में कत्ल' प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर 'मुर्दा, मवेशी, माफिया' प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।... और पढ़ें
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