बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में खारिज, प्रबल हत्याकांड में सातों आरोपियों को सख्त से सजा
प्रबल हत्याकांड में सातों आरोपियों को अदालत ने दोषी ठहराया और उन्हें कठोर सजा सुनाई। बचाव पक्ष ने कई अहम दलीलें रखी लेकिन अदालत ने उन्हें उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर स्वीकार नहीं किया। अदालत ने प्रमुख तर्कों पर विस्तार से अपनी टिप्पणी दर्ज की

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a6d701c54b7e9db6807ca66","slug":"prabal-agarwal-murder-case-defense-arguments-failed-to-hold-in-court-verdict-addressed-each-point-individually-2026-08-01","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"प्रबल हत्याकांड: बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में नहीं टिकीं फैसले में एक-एक तर्क का दिया जवाब; ये नजीर बनी आधार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रबल हत्याकांड: बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में नहीं टिकीं फैसले में एक-एक तर्क का दिया जवाब; ये नजीर बनी आधार
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:08 AM IST
सार
19 दिसंबर की रात बिजनौर के प्रबल की हत्या हुई और 15 जनवरी 2013 को उसका शव मिला। 26 जुलाई 2013 को पुलिस ने कोर्ट में इस केस में आरोपपत्र दाखिल किया। 14 वर्षों तक चली इस इंसाफ की लड़ाई में 352 तारीख लगीं। इसके बाद प्रबल की बहन प्राची के लिए शुक्रवार को इंसाफ की घड़ी आ ही गई।
विज्ञापन
1 of 11
Prabal Agarwal Murder Case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
बिजनौर के प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में बचाव पक्ष ने सुनवाई के दौरान कई अहम दलीलें रखीं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया। फैसले में न्यायालय ने बचाव पक्ष के प्रत्येक प्रमुख तर्क पर विस्तार से अपनी टिप्पणी दर्ज की है।
बचाव पक्ष का पहला तर्क था कि पोस्टमार्टम होने मात्र से यह सिद्ध नहीं होता कि बरामद शव प्रबल अग्रवाल का ही था। इस पर अदालत ने कहा कि गवाह अरविंद कुमार ने बताया कि 15 जनवरी 2013 को गंगा किनारे मिले शव की जेब से मोबाइल फोन मिला था।
उसी मोबाइल से मृतक की बहन को सूचना दी गई, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और शव की पहचान प्रबल अग्रवाल के रूप में की। न्यायालय ने कहा कि इन तथ्यों के बाद यह तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पोस्टमार्टम किसी अन्य व्यक्ति के शव का हुआ था।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि विवेचना के दौरान जिन गवाहों ने पुलिस को बयान दिए थे, उनमें से कुछ न्यायालय में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। अदालत ने कहा कि किसी गवाह के पक्षद्रोही हो जाने मात्र से पूरा अभियोजन असत्य नहीं हो जाता। यदि अन्य विश्वसनीय साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं तो ऐसे गवाहों के मुकरने का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि अन्य गवाहों की गवाही, बरामदगी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
3 of 11
सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए विनय अग्रवाल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अदालत बोली- खराब विवेचना से दोषियों को नहीं मिल सकता लाभ
प्रबल हत्याकांड में सातों आरोपियों को दोषी ठहराते समय अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस विवेचना में कमियां होने मात्र से आरोपी बरी नहीं हो सकते। अदालत ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि अभियोजन के साक्ष्य अपराध सिद्ध करते हैं तो विवेचना की खामियों का लाभ आरोपियों को नहीं दिया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 11
सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए अपूर्व
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
निर्णय में अदालत ने हरेंद्रा राय बनाम बनाम बिहार राज्य आपराधिक अपील संख्या-1726/2015 (निर्णय दिनांक 18 अगस्त 2023) के कई पैरा का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि कई मामलों में जांच अधिकारी लापरवाही करते हैं या महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र नहीं करते, लेकिन ऐसी चूक का पुरस्कार आरोपियों को नहीं दिया जा सकता। यदि ऐसा किया गया तो न्याय व्यवस्था और आम लोगों का विश्वास दोनों प्रभावित होंगे।
विज्ञापन
5 of 11
सजा सुनाए जाने के बाद जेल जाते हुए राहुल गुप्ता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन धाराओं में सुनाई गई सजा
अदालत ने प्रबल हत्याकांड के सभी दोषियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 364 (अपहरण), 147 (दंगा करने), 201 (साक्ष्य मिठाने) में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक धारा के तहत अलग-अलग सजा निर्धारित की, जो नियमानुसार साथ-साथ चलेगी। साल 2012 में हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड में इंसाफ के लिए मृतक के परिजन लगातार पैरवी कर रहे थे।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
मौलाना का घिनौना खेल, महिला रिपोर्टर को ब्रेनवॉश किया, निकाह के लिए दबाव डाला - देखिए पूरी वीडियो

पुलिस के जोर में कानून का शासन: विचार करना होगा

भारत के 'कॉकरोच' प्रदर्शनकारियों को लगातार कानूनी दबाव का सामना करना पड़ रहा है

सड़कों पर आगरा पशुओं का खतरा कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी सरकार को चुनौती

पेपर लीक माफिया को कोई राहत नहीं, सख्त सजा और भारी जुर्माने के साथ संशोधित कानून लागू हुआ

दिल्ली: IPS दीपक गहलावत को मिली नियमित जमानत, अदालत ने रखी बड़ी शर्त

दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भड़की प्री-पोल विवाद, आम आदमी पार्टी ने भाजपा या सीपीआई-एम को समर्थन नहीं देंगे: कपिल मिश्रा

भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों पर निर्णय: क्या यह लिंग पहचान के अधिकार के लिए नया दिशानिर्देश है?
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आवारा पशुओं से हादसों के पीड़ितों को 15 लाख मुआवजा
- इस्लाम अपनाने वाली दो युवतियों को अदालत में पेश करें: इलाहाबाद हाई कोर्ट का निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला: उम्र कैद की सजा संवैधानिक प्रावधानों का हनन नहीं
- कानून की जानकारी है सबसे बड़ा बचाव, जज ने छात्रों को दिये महत्वपूर्ण सुझाव
- बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर कितना मजबूत है नया डेटा कानून?
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आजीवन कारावास को प्राकृतिक मृत्यु तक बरकरार रखने की वैधता बरकरार
- सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों के बहुविवाह प्रतिबंध वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया
- सुप्रीम कोर्ट ने NSE को RTI के दायरे के बाहर रखा

