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असहमत लोगों की आवाज दबाने के लिए कानूनों का हो रहा इस्तेमाल: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने कहा है कि असहमत लोगों की आवाज दबाने के लिए सभी तरह के कानूनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने यह बात दिवंगत जस्टिस एचआर खन्ना की स्मृति में आयोजित लेक्चर सीरीज के दौरान कही।

1 अगस्त 2026 को 01:16 pm बजे
असहमत लोगों की आवाज दबाने के लिए कानूनों का हो रहा इस्तेमाल: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस

सौजन्य से:- Navbharat Times

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने कहा है कि एक्टिविस्ट और असहमत लोगों की आवाज दबाने के लिए सभी तरह के कानूनों को इस्तेमाल किया जा रहा है।

नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह ने कहा है कि एक्टिविस्ट और असहमत लोगों की आवाज दबाने के लिए सभी तरह के कानूनों को इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कोई युवा किसी राजनेता का इस्तीफा मांगता है तो उसे लाठियां खानी पड़ती हैं और उसके खिलाफ केस दर्ज करा दिए जाते हैं।

बोलने की आजादी लोकतांत्रिक गहराई से जुड़ी है

दिवंगत जस्टिस एचआर खन्ना की स्मृति में गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित लेक्चर सीरीज में जस्टिस शाह ने यह बात कही। उन्होंने कहा, 'ऐतिहासिक रूप से सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को माना कि बोलने और अपनी बात कहने की आजादी लोकतांत्रिक गहराई से जुड़ी है। राजनीतिक चर्चा से लोगों को जानकारी मिलती है और अदालत अपना काम ठीक से कर पाती है। कोर्ट ने लोकतांत्रिक समाज को बनाए रखने के लिए अलग अलग विचारों के महत्व, उनके सम्मान और सहिष्णुता की जरूरत पर जोर दिया है।'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एपी शाह ने कहा कि आलोचना का सामना करने का सबसे सही तरीका लोगों से बात करना, सामने बोलने वाले की बात पर प्रतिक्रिया देना होता है। लेकिन लगता है कि अपने देश के सियासतदान शायद यह बात भूल चुके हैं।

दुर्भाग्य से, आज एक्टिविस्ट, असहमति रखने वालों और राजनीतिक कार्टूनिस्टों को चुप कराने और परेशान करने के लिए कई तरह के कानूनों और तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर युवाओं का कोई समूह किसी नेता से जवाबदेही की मांग करते हुए उनके इस्तीफे की मांग करता है, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं या फिर उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दिए जाते हैं।

जस्टिस एपी शाह, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस

सवाल करने वाले मीडिया हाउस पर क्या बोले?

जस्टिस एपी शाह ने कहा कि यदि कोई मीडिया हाउस सरकार की आलोचना करता है तो उसके खिलाफ टैक्स के केस लाद दिए जाते हैं या फिर जांच पड़ताल शुरू कर दी जाती है। उन्होंने कहा, 'कहीं और, कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन की बात गलत समझ लेता है... यह बहुत आम बात हो गई है। कोई बुरा मान जाता है, और देखते ही देखते कॉमेडियन जेल पहुंच जाता है। यहां तक कि अगर आप ऐसे कॉमेडियन का शो आयोजित करने वाले ऑर्गनाइजर हैं, तो आपको भी जेल में डाल दिया जाता है। बाहर निकलने में हफ्तों, या महीनों भी लग सकते हैं।' जस्टिस एपी शाह ने अदालतों की भूमिका पर भी बड़ी बात कही।

सड़कें, कोर्टरूम और संसद, किसी भी समाज के पूरक स्तंभ हैं। जजों को हीरो जैसे एक्टिविस्ट बनने की जरूरत नहीं है। उन्हें बस आजादी और निडरता से अपना काम करने पर ध्यान देना चाहिए, साथ ही कानून के शासन, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और संवैधानिक नैतिकता के प्रति निष्ठा बनाए रखनी चाहिए।

जस्टिस एपी शाह, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस

सीजेपी प्रोटेस्ट ने बताया लोकतांत्रिक भावना जिंदा है

देश भर में NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नीट जैसी जैसी खास परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों से कहीं आगे की चीज है। उन्होंने कहा कि ये लोकतांत्रिक ऊर्जा के फिर से जागने का प्रतीक हैं। सालों तक कई लोगों का मानना था कि असहमति की आवाज कमजोर पड़ रही है, सिविल सोसाइटी थक चुकी है, राजनीतिक विपक्ष बेअसर है और आलोचना की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म हो गई है। इन युवा नागरिकों ने दिखाया है कि भारत में लोकतांत्रिक भावना अभी भी मजबूती से जिंदा है, विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे। और उनमें पारदर्शिता व जवाबदेही की वाजिब मांगें थीं।

💬NBT चर्चा

पेपर लीक बिल में कड़ी सजा-जुर्माने का प्रावधान है, इस पर आप क्या कहेंगे?

लेखक के बारे मेंवरुण शैलेशवरुण शैलेश, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। वह अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और होमपेज टीम का हिस्सा बने। वह शिफ्ट और होमपेज की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ न्यूज की प्रभावी प्लानिंग, खबर लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उन्हें प्रिंट, न्यूज एजेंसी और डिजिटल न्यूज टीम में काम करने का लंबा अनुभव है। इस दौरान डेस्क के साथ रिपोर्टिंग का अनुभव भी हासिल किया। सियासी गलियारे में होने वाली हलचलों, सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों, समाज में सांस्कृतिक बदलावों पर नजर रखते हैं। करंट अफेयर्स को लेकर सचेत रहने वाले वरुण शैलेश रोजाना खबरों को विभिन्न एंगल से प्रस्तुत करने को लेकर एक्टिव रहते हैं। वैश्विक राजनीति का देश की सियासत पर पड़ने वाले असर, जियोपॉलिटिकल सिचुएशन के लिहाज से खबरों के प्रजेंटेशन में महारत रखते हैं। वरुण शैलेश न्यूज को चैलेंज की तरह लेते हैं और खबरों की दुनिया को एन्जॉय करते हैं।

विशेषज्ञताः करंट अफेयर्स, ब्यूरोक्रेसी और राजनीतिक खबरों के साथ ग्लोबल पॉलिटकल सिचुएशन का देश की राजनीति पर पड़ने वाले असर के लिहाज से खबरों को प्रस्तुत करते हैं। सोशल जस्टिस, चाइल्ड प्रोटेक्शन से जुड़े इश्यूज पर पकड़।

पत्रकारिता का अनुभवः वरुण शैलेश ने वर्ष 2009 में इंडो एशियन न्यूज सर्विस (IANS)से करियर की शुरुआत की, जहां उन्होंने रिपोर्टिंग और खबरों के संपादन में महारत हासिल की। इसके बाद हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़े और सेंट्रल डेस्क पर पांच साल से ज्यादा समय तक रहे। इस दौरान, उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली विधानसभा चुनावों से जुड़ी खबरों के संपादन की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद दैनिक जागरण के संपादकीय पेज और Op-ed पेज पर रहे। इस दौरान विभिन्न विषयों के नामचीन लेखकों, वरिष्ठ पत्रकारों के लेखों के संपादन के साथ साथ आइडिएशन, संपादन की जिम्मेदारी संभाली। 2018 में आजतक (डिजिटल) टीम का हिस्सा बने। आजतक में मुख्य न्यूज टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान लोकसभा चुनाव 2019, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनावों को कवर किया। दिल्ली में विभिन्न पॉलिटकल गतिवियों को कवर किया। आजतक में इंटरनेशनल-फीचर टीम को भी लीड किया। आजतक डिजिटल में इंटरनेशनल पेज को दूसरा सबसे अधिक नंबर लाने वाले सेक्शन के तौर पर स्थापित किया। दैनिक भास्कर (डिजिटल) में वुमन सेक्शन (फीचर) टीम को लीड किया। इस दौरान आइडिएशन, प्रभावी प्लानिंग की जिम्मेदारी संभालने के साथ साथ हेल्थ, क्राइम, फूड और सोशल इश्यूज पर जमकर लिखा।

वरुण शैलेश ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से सोशियोलॉजी (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। फिर भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा करने के बाद पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर की डिग्री भी हासिल की।... और पढ़ें

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