गूगल ड्राइव में गंदी फोटो वीडियो रखना कानून के नजरिए से कितना सही? जानें प्राइवेसी कानून, बच्चों से जुड़े कंटेंट और पुलिस की निगाह
गूगल ड्राइव पर अवैध सामग्री रखने से जुड़े कानूनी खतरे गहरे हो सकते हैं। भारत में व्यापार से जुड़े कानूनों के तहत साझा करने अथवा डाउनलोड करने से पहले भी वैधता आवश्यक है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
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गूगल ड्राइव की प्राइवेसी और कानून
सबसे पहली बात तो यह कि Google Drive एक क्लाउड स्टोरेज सेवा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वहां रखा हर डेटा कानूनी जांच से हमेशा बाहर रहेगा। Google की सेवा शर्तें और भारतीय कानून, दोनों अवैध सामग्री पर कार्रवाई की अनुमति देते हैं। यदि किसी खाते में कानून के विरुद्ध सामग्री होने की जानकारी सक्षम एजेंसियों तक पहुंचती है, तो जांच के दौरान डेटा मांगा जा सकता है। केवल Drive में निजी और वैध फोटो रखना अपने-आप में कोई बड़ा अपराध नहीं है। इसलिए प्राइवेसी का अधिकार और कानून का पालन, दोनों साथ-साथ लागू होते हैं।भारत के आईटी एक्ट की कौन-सी धाराएं लागू होती हैं?
देश में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण से संबंधित है। धारा 67A यौन रूप से स्पष्ट रुप से Sexually Explicit सामग्री पर लागू होती है। वहीं धारा 67B बच्चों से जुड़े यौन शोषण संबंधी कंटेंट (CSAM/CSEAM) पर बेहद सख्त प्रावधान करती है। ऐसे मामलों में पुलिस संज्ञेय अपराध के रूप में जांच कर सकती है। इसलिए कानून के नजरिए से भी अवैध डिजिटल सामग्री रखना, साझा करना या प्रसारित करना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।पुलिस कब कर सकती है जांच?
दरअसल सच्चाई यह है कि महज किसी व्यक्ति के Google Drive में निजी फोटो होने से पुलिस स्वतः जांच शुरू नहीं करती। लेकिन यदि किसी शिकायत, साइबर इंटेलिजेंस, अदालत के आदेश या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सूचना मिलती है तो जांच शुरू हो सकती है। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाते हैं और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि अपराध के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तभी आगे की कार्रवाई होती है। इसलिए हर Drive पर पुलिस की निगाह कहना सही नहीं होगा, लेकिन कानून के तहत जांच संभव है।क्या मुसलमानों को UCC से बाहर रखने की मांग जायज है? जानिए संविधान, अनुच्छेद 44 और सुप्रीम कोर्ट का कानूनी नजरिया
बच्चों से जुड़ी सामग्री पर सबसे सख्त कानून
यदि किसी क्लाउड स्टोरेज में बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री (CSAM/CSEAM) मिलता है तो मामला बेहद गंभीर माना जाता है। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल भी स्पष्ट करता है कि ऐसे कंटेंट का निर्माण, डाउनलोड, संग्रह, प्रकाशन या वितरण कानूनन अपराध है। ऐसे अपराधों में सख्त दंड और पुलिस जांच का प्रावधान है।कानपुर का मामला, Google Drive में गंदे वीडियो और तस्वीरें
हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में Google Drive से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के उदाहरण सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने कानपुर में 25-26 वर्षीय युवक को नाबालिग बच्चियों और महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें गूगल ड्राइव पर अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले का खुलासा किसी सामान्य शिकायत से नहीं, बल्कि गूगल के सुरक्षा तंत्र से मिले इनपुट और उसके बाद हुई साइबर जांच के जरिए हुआ। तकनीकी जांच में मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील सामग्री देखने पर रोक नहीं लगा सकते, ‘सरकार से कीजिए मांग’, क्यों कहा सुप्रीम कोर्ट ने
निजी फोटो और अवैध कंटेंट में फर्क समझें
कानून निजी, सहमति से रखी गई वयस्कों की वैध तस्वीरों और अवैध अश्लील सामग्री के बीच अंतर करता है। यदि सामग्री किसी अपराध से जुड़ी नहीं है और उसका अवैध प्रसारण नहीं किया गया है, तो केवल उसका निजी संग्रह हर मामले में अपराध नहीं माना जाता। लेकिन बिना सहमति के निजी तस्वीरें साझा करना, बच्चों से जुड़ी यौन सामग्री रखना या कानूनन प्रतिबंधित कंटेंट अलग श्रेणी में आता है।'क्या वैवाहिक दुष्कर्म की कानूनी छूट पति को पत्नी के साथ हर तरह के यौन अपराधों से भी बचाती है?' सुप्रीम कोर्ट खोजेगा जवाब
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