होम›अपराध›इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला- संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत FIR दर्ज करें!
अपराध

इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला- संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत FIR दर्ज करें!

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) के आदेश को रद कर दिया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों को एफआईआर दर्ज न करने की बात कही गई थी।

30 जुलाई 2026 को 03:33 pm बजे
इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला- संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत FIR दर्ज करें!

सौजन्य से:- Jagran

Allahabad High Court ने कहा- 'संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करना अनिवार्य

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के तहत एक छात्र ने ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट में एससी एसटी एक्ट में एफआइआर दर्ज करने की मांग खारिज किए जाने वाला आदेश रद

- विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) ने अनुसूचित जाति से जुड़े आइसा छात्रनेता की मांग खारिज की थी

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति जयप्रकाश तिवारी की एकलपीठ ने विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें अनुसूचित जाति से जुड़े आइसा छात्र नेता विवेक कुमार की शिकायत पर एफआइआर दर्ज कराने की मांग को ‘संदिग्ध’ बताकर खारिज कर दिया गया था।

याची का आरोप

इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर और यूजीसी-नेट उत्तीर्ण याची आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की इलाहाबाद इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनका आरोप है कि 17 अक्टूबर 2023 को विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट के बाहर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर राकेश सिंह ने बिना किसी उकसावे जातिसूचक गालियों का प्रयोग किया और लाठी से उन पर हमला कर दिया।

सीसीटीवी व मोबाइल फुटेज में घटना कैद बताया

बताया कि यह घटना मौके पर मौजूद सब-इंस्पेक्टर के सामने हुई और सीसीटीवी व मोबाइल फुटेज में भी कैद है। पुलिस द्वारा मेडिकल जांच नहीं कराए जाने पर वह खुद तेज बहादुर सप्रू अस्पताल गए और इलाज कराया। इसकी फोटो अखबारों में छपी है। घटना के दिन ही उन्होंने कर्नलगंज थाने में लिखित शिकायत दी। इसके बाद सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी के साथ मिलकर उन्होंने एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए दोबारा शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

आदेश को त्रुटिपूर्ण और गैर-तर्कसंगत करार दिया

पुलिस आयुक्त सहित उच्च अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, प्रयागराज की अदालत में आवेदन दिया, जिसे 18 फरवरी 2024 के आदेश से खारिज कर दिया गया। हाई कोर्ट ने संबंधित अदालत के आदेश को त्रुटिपूर्ण और गैर-तर्कसंगत करार दिया।

खबरें और भी

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कहा, विशेष न्यायाधीश ने साक्ष्यों पर विचार किए बिना ही आवेदन खारिज कर दिया, जो न्यायिक मस्तिष्क के प्रयोग के अभाव को दर्शाता है। प्रकरण दोबारा विचार के लिए विशेष अदालत को भेजा गया है। एससी/एसटी एक्ट की धारा 4 के तहत कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार करने का निर्देश कोर्ट ने दिया है।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग
अपराध

बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव
अपराध

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं
अपराध

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद
अपराध

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
अपराध

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अपराध

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

ताज़ा ख़बरें