वंदे मातरम बिल पर घमासान, डीएमके ने कानूनी राष्ट्रवाद का विरोध किया
वंदे मातरम बिल लोकसभा से पारित हो गया, डीएमके ने कानूनी राष्ट्रवाद को थोपा जाने का विरोध किया और कहा कि इससे राज्यों के गीतों की भावनाएं आहत होती हैं।

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
वंदे मातरम् बिल राज्यसभा के बाद लोकसभा से भी पास हो गया है. हंगामे के बीच यह बिल लोकसभा से पारित कर दिया गया है और इसके बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.
डीएमके ने लोकसभा में इस बिल का विरोध किया. डीएमके का कहना है कि कानून से राष्ट्रवाद नहीं थोपा जा सकता है. यह बिल बगैर चर्चा के हंगामे के बीच पारित हुआ. राज्यसभा से यह बिल पहले ही पारित हो गया था.
इस बीच डीएमके की कनिमोझी ने कहा कि आज सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' न गाने को क्रिमिनल ऑफेंस बना दिया है.
यह भी पढ़ें: योगी सरकार का नकली दवाओं के सिंडिकेट पर बड़ा एक्शन, अब तक 6 FIR दर्ज
कनिमोझी ने कहा, तमिलनाडु समेत कई राज्यों का अपना राज्य गीत है और 50 से ज़्यादा सालों से इसे राज्य गीत के तौर पर सबसे पहले गाया जाता रहा है. आज, कई राज्यों के गीतों को तीसरे स्थान पर धकेल दिया जाएगा.
कनिमोझी ने बताया कि इससे हमारे राज्यों के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं. इसके अलावा, देश के महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर का भी यह मानना था कि गीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाने चाहिए, क्योंकि बाकी हिस्से से भावनाएं आहत हो सकती हैं. आज इसे अनिवार्य बनाकर देश के हितों के खिलाफ काम किया जा रहा है.
Advertisement
बता दें, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में वंदे मातरम् की रचना की थी और 1882 में प्रकाशित अपने उपन्यास 'आनंदमठ' में इसे शामिल किया था. इसके बाद 1937 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने फैसला किया कि सार्वजनिक आयोजनों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे.
---- समाप्त ----
TOPICS:
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत में न्यायाधीश नहीं थोप सकते निजी नैतिकता
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ऊर्जा मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायत को खारिज करने वाले हाई कोर्ट आदेश को बरकरार रखा, भाजपा MLA की अपील खारिज
- उच्च न्यायालय ने SGPC कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उलट दिया, पाया 'भुकी' की पुनःप्राप्ति का सबूत अप्रमाणित
- बिल गेट्स की चेतावनी: अनियंत्रित AI से हो सकता है 100 करोड़ मौतों का जोखिम
- गोवा में धर्म‑परिवर्तन बिल को मिली आंतरिक विरोध से ठप्पी
- दिल्ली में ट्रैफ़िक चालान निपटाने का सुनहरा मौका: 25 अक्टूबर को लोक अदालत
- कर्नाटक के डीजीपी ने सेक्शन 35 बीएनएसएस के कड़ाई से पालन के लिए निर्देश जारी, पुलिस को व्यक्तिगत जवाबदेही की चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने फाइटर पायलट की विधवा को वायु सेना में पुनः भर्ती का आदेश दिया

