सुप्रीम कोर्ट: पैलेट गन से घायल लोगों का इलाज सुनिश्चित करें
भारत की सुप्रीम कोर्ट ने पैलेट गन से घायल लोगों के इलाज के प्रति सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी किया है. यह आदेश पुलिस संबंधी गतिविधियों के दौरान पैलेट गन का उपयोग करते समय घायल हुए लोगों के लिए है. उच्च न्यायालय के निर्देश का उल्लंघन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस संगठनों को नोटिस जारी किया है.

सौजन्य से:- DW.com
पैलेट गन से घायल लोगों का इलाज सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट
प्रकाशित ३० जुलाई २०२६आखिरी अपडेट ३० जुलाई २०२६भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.
आपके लिए अहम जानकारी
पैलेट गन से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का इलाज सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट
भीषण गर्मी के कारण जर्मनी में करीब 10 हजार मौतें दर्ज हुईं
बदला गया भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग, पूर्व कप्तानों ने की आलोचना
केन्या में टमाटर खाने के बाद 15 हाथियों की संदिग्ध मौत
फ्रांस और स्पेन के बाद, ग्रीस और तुर्की में फैली जंगल की आग
पाकिस्तान में चेकपॉइंट पर हुए हमले में नौ पुलिसकर्मियों की मौत
पश्चिम बंगाल: सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में अंडों की वापसी
जर्मनी में मिलीं पक्षियों की 40 हजार साल पुरानी दो मूर्तियां
शोधकर्ताओं को जर्मनी की एक गुफा में पक्षियों की दो छोटी मूर्तियां मिली हैं. ये मूर्तियां हाथीदांत से बनाई गई हैं. यह खोज जर्मनी के दक्षिणी राज्य बाडेन-वुर्टेमबर्ग में हुई है. माना जा रहा है कि यह कलाकृतियां लगभग 40 हजार साल पुरानी हैं. इन्हें हिमयुग के शुरुआती आधुनिक इंसानों ने औजारों से बनाया था. इन दोनों मूर्तियों का वजन केवल 1.3 ग्राम और 0.7 ग्राम है.
इनमें से एक मूर्ति की लंबाई सिर्फ दो सेंटीमीटर है. यह इस विश्व धरोहर क्षेत्र में पाई गई हिमयुग की सबसे छोटी कलाकृति है. ट्यूबिंगन विश्वविद्यालय के शोध प्रमुख निकोलस कॉनार्ड ने इसे "साल की सबसे बड़ी खोज" घोषित किया है. मिली मूर्तियों में से एक बैठी हुई चिड़िया की है. वहीं दूसरी मूर्ति फैले हुए पंखों वाले पक्षी की है. इसका बायां पंख टूटा हुआ है.
यह मूर्तियां अप्रैल तक ब्लाउब्यूरेन म्यूजियम में प्रदर्शन के लिए रखी जाएंगी. जिस गुफा में यह मिली हैं, वह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है. इसी गुफा में 2008 में इंसान की सबसे पुरानी मूर्ति और दुनिया का सबसे पुराना संगीतमय वाद्य यंत्र भी मिला था. उस दौर के लोगों के लिए इन पक्षियों का क्या महत्व था, यह अभी स्पष्ट नहीं है. इस क्षेत्र की अन्य गुफाओं में मैमथ, गुफा शेर और जंगली घोड़ों की मूर्तियां मिली हैं, लेकिन पक्षी की मूर्ति सिर्फ यहीं पाई गई है.
वंदे मातरम का अपमान करने पर होगी तीन साल तक की सजा, संसद में पास हुआ बिल
भारत की लोकसभा में गुरुवार, 30 जुलाई को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को वैधानिक संरक्षण देने वाला बिल पास किया गया. यह बिल राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के प्रति किसी भी प्रकार की बाधा या अपमान को अपराध घोषित करता है. यह बिल राज्यसभा में बुधवार को ही पास हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा. कानून बनने के बाद, वंदे मातरम का अपमान करने पर तीन साल जेल तक की सजा हो सकेगी.
इस बिल का नाम राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बताया था कि साल 1971 में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के लिए इस कानून को लाया गया था. अब संशोधन के जरिए राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी इस सूची में जोड़ा जा रहा है. इससे वंदे मातरम को जन गण मन के समान वैधानिक संरक्षण मिलेगा.
तमिलनाडु की पार्टी डीएमके ने लोकसभा में इस बिल का कड़ा विरोध किया. डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि देश के पूर्वजों में इतनी समझदारी थी कि उन्होंने राष्ट्रगीत के केवल दो पद ही अपनाए थे, लेकिन केंद्र सरकार इस कानून का इस्तेमाल करके अपने बांटने वाले एजेंडे को आगे बढ़ा रही है. वहीं, बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि संसद में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' पर पहले ही लंबी बहस हो चुकी है और प्रस्तावित कानून अब इसे कानूनी सुरक्षा दे रहा है.
आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर बीजेपी का विरोध-प्रदर्शन, पंजाब के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार, 30 जुलाई को राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया. बीजेपी का आरोप है कि पंजाब में हाल ही में हुई फार्मेसी ऑफिसर की परीक्षा का पेपर लीक हुआ था और इसकी जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को इस्तीफा दे देना चाहिए.
बीजेपी सांसद हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि अभी तक आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पंजाब के शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया तो यह प्रदर्शन दिल्ली से पंजाब तक जाएगा. बीजेपी का आरोप है कि पंजाब सरकार ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है.
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार ने पेपर लीक के आरोपों को लगातार खारिज किया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि फार्मेसी ऑफिसर की परीक्षा में चीटिंग करने की कोशिश हुई थी, लेकिन यह पेपर लीक नहीं था. उन्होंने दावा किया कि आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था.
सलमान रुश्दी पर हमला करने वाला शख्स आतंकवाद के आरोपों में भी दोषी करार
प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर 2022 में हमला करने वाले हादी मतार को आतंकवाद के आरोपों में भी दोषी पाया गया है. 28 साल के मतार पर न्यूयॉर्क के बफेलो की अदालत में मुकदमा चला. मतार पहले से ही 25 साल की जेल की सजा काट रहा है. उसे हत्या के प्रयास के मामले में यह सजा मिली थी.
अब आतंकवाद के नए मामलों में उसे उम्रकैद की सजा हो सकती है. अदालत 3 नवंबर को सजा का एलान करेगी. जूरी ने केवल दो घंटे की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. मतार को हिज्बुल्लाह संगठन की मदद करने का दोषी पाया गया. उस पर सीमा पार आतंकवाद फैलाने का आरोप भी सही साबित हुआ.
अभियोजकों के मुताबिक, मतार ने सलमान रुश्दी की किताब के कारण हमला किया था. रुश्दी ने 1988 में "द सैटैनिक वर्सेस" नाम की किताब लिखी थी. इस किताब के बाद रुश्दी को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं. अदालत में सुनवाई के दौरान 79 वर्षीय सलमान रुश्दी ने खुद गवाही दी.
सलमान रुश्दी के खिलाफ 1989 में फतवा जारी हुआ था. यह फतवा ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातोल्ला रुहोल्ला खोमैनी ने दिया था. खोमैनी ने इस किताब को ईशनिंदा माना था. हालांकि 1998 में ईरान की सरकार ने इस फतवे से खुद को अलग कर लिया था. लेकिन अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, हिज्बुल्लाह और ईरान के नए नेता अली खमेनेई ने बाद में इस फतवे का फिर से समर्थन किया था.
खरगे बोले, पेपर लीक के खिलाफ संशोधित बिल का स्वागत, लेकिन यह अभी भी अधूरा है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में कहा कि वे पेपर लीक के खिलाफ 'लोक परीक्षा संशोधन विधेयक' का स्वागत करते हैं, लेकिन यह अभी भी अधूरा है. खरगे ने कहा कि यह बिल पेपर लीक होने के बाद की कार्रवाई को मजबूत करता है, लेकिन पेपर लीक होने से रोकने की मजबूत व्यवस्था इसमें नहीं है.
खरगे ने कहा, “आज सरकार जो काम कर रही है, उसके बारे में हमने 2024 में ही सुझाव दिए थे, लेकिन उस समय सरकार ने हमारी बात नहीं मानी…तब सरकार इतनी जल्दबाजी में यह कानून लाई थी कि दो साल के भीतर ही उसमें संशोधन करना पड़ रहा है.” खरगे ने कहा कि अहम सवाल यह है कि परीक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया जाए, ताकि पेपर लीक ना हो.
खरगे ने अपने संबोधन में दावा किया कि पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए हैं. उन्होंने कहा, “आज सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात करती है, लेकिन 2024 नीट पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को क्लीन चिट मिल गई…2026 नीट पेपर लीक के मामले में जब कुछ दिन पहले सुनवाई होनी थी, तब पहली ही सुनवाई में सीबीआई के वकील पेश नहीं हुए.”
खरगे ने राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेस की ओर से कई मांगें सामने रखीं. उन्होंने कहा कि सारी परीक्षाओं के लिए एक 'वार्षिक कैलेंडर' बनाया जाए, ताकि सरकार जवाबदेह बने. उन्होंने दूसरी मांग रखी कि मोदी सरकार संसद के सामने एक ‘राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति’ पेश करे, जिसमें ये साफ किया जाए कि देश में रोजगार देने वाला निवेश कैसे लाया जाएगा. उन्होंने केंद्र सरकार से खाली पड़े पदों को भी भरने की मांग की.
सात सालों में पहली बार मुनाफे में आयी जर्मनी की राष्ट्रीय रेल कंपनी
जर्मनी की राष्ट्रीय रेल कंपनी 'डोएचे बान' (डीबी) को 2026 की पहली छमाही में मुनाफा हुआ है. ऐसा सात सालों में पहली बार हुआ है. कंपनी ने 147 लाख यूरो (लगभग 167 लाख डॉलर) का प्रॉफिट दर्ज किया है. इसके विपरीत, 2025 की पहली छमाही में कंपनी को 760 लाख यूरो का नुकसान हुआ था.
डोएचे बान की सीईओ एवलिन पाला ने एक बयान में कहा कि सात सालों में पहली बार हमारा रेल व्यवसाय वापस मुनाफे में आया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह तभी संतुष्ट होंगी जब रेल सेवाओं के स्टैंडर्ड भी बेहतर हों.
कंपनी के मुताबिक, इस मुनाफे के पीछे का कारण है - रीस्ट्रक्चरिंग. इस रीस्ट्रक्चरिंग में कॉस्ट-कटिंग और कार्यबल में छंटनी शामिल है. डोएचे बान पिछले कुछ सालों से समय की पाबंदी में कमी, पुरानी बुनियादी संरचना और कमजोर वित्तीय प्रदर्शन से जूझ रही थी. कंपनी ने 2025 में एक अरब यूरो से अधिक का घाटा दर्ज किया था.
जुलाई में जर्मनी के चार राज्यों में बढ़ी महंगाई दर
जर्मनी के चार प्रमुख राज्यों में जुलाई के महीने में महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. गुरुवार, 30 जुलाई को जारी शुरुआती आंकड़ों से संकेत मिलते हैं कि इस महीने राष्ट्रीय स्तर पर भी मुद्रास्फीति की दर बढ़ सकती है.
बवेरिया राज्य में महंगाई दर जून के 2.5 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 2.8 प्रतिशत हो गई है. जर्मनी के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया में यह 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 2.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसके अलावा बाडेन-वुर्टेमबर्ग में यह 2.5 प्रतिशत और लोअर सैक्सनी में बढ़कर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई है.
दुनिया में लड़ाई के माहौल ने बिगाड़ा जर्मनों के घूमने का प्लान
ईरान में चल रहे युद्ध के कारण पिछले कुछ महीनों में ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों में उछाल आया है. जर्मन सरकार का अनुमान है कि इस साल महंगाई दर बढ़कर 2.7 प्रतिशत और 2027 में 2.8 प्रतिशत हो सकती है. रॉयटर्स के सर्वेक्षण के अनुसार, अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि जुलाई में जर्मनी की समन्वित राष्ट्रीय मुद्रास्फीति दर 2.8 प्रतिशत रह सकती है.
भीषण गर्मी के कारण जर्मनी में करीब 10 हजार मौतें दर्ज हुईं
जर्मनी में भीषण तापमान के कारण हजारों लोगों की जान चली गई है. रॉबर्ट कॉक इंस्टीट्यूट (आरकेआई) की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, 19 जुलाई तक गर्मी से होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या कम से कम 9,800 पहुंच गई है. यह आंकड़ा 2018 में दर्ज किए गए 8,900 मौतों के रिकॉर्ड को भी पार कर गया है.
भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी
गर्मी से होने वाली ज्यादातर मौतें 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में दर्ज की गई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक गर्मी के दौरान पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं की जान गई है. हालांकि, संस्थान का कहना है कि यह मुख्य रूप से अधिक आयु वर्ग में महिलाओं की अधिक आबादी को दर्शाता है. ज्यादातर मामलों में उच्च तापमान दिल, फेफड़े या गुर्दे की बीमारियों जैसी पहले से मौजूद स्थितियों को और गंभीर बना देता है.
यही वजह है कि मृत्यु प्रमाण पत्रों पर आमतौर पर गर्मी को मौत के कारण के रूप में दर्ज नहीं किया जाता है और यह आधिकारिक आंकड़ों में सीधे दिखाई नहीं देता है. इसके बजाय, शोधकर्ता भीषण गर्मी वाले हफ्तों के दौरान होने वाली मौतों की तुलना सामान्य तापमान वाले समय की मौतों से करके यह अनुमान लगाते हैं.
पश्चिम बंगाल: सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में अंडों की वापसी
पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में अगस्त से अंडों की वापसी हो जाएगी. राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसकी घोषणा की है. राज्य में बीजेपी की नई चुनी गई सरकार ने कुछ सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील से अंडों को हटा दिया था. धार्मिक संस्था इस्कॉन को इन स्कूलों के लिए शाकाहारी भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. कई शिक्षकों, अभिभावकों और पोषण विशेषज्ञों ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे कम आय वर्ग वाले परिवारों के बच्चे प्रोटीन के एक प्रमुख स्रोत से वंचित रह जाएंगे.
शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार, 29 जुलाई को कहा कि कुछ अभिभावकों ने सरकार से मिड-डे मील में अंडों को शामिल करने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत, इस्कॉन स्कूलों में शुद्ध शाकाहारी भोजन पहुंचाता रहेगा और स्वंय सहायता समूहों के जरिए अलग से उबले हुए अंडे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पहुंचाए जाएंगे. न्यूज वेबसाइट एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, बच्चों को हफ्ते में एक या दो दिन मिड-डे मील के साथ अंडे दिए जाएंगे.
नीले से केसरिया किया गया भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग, पूर्व कप्तानों ने की आलोचना
भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों की जर्सी के रंग को नीले से बदलकर केसरिया कर दिया गया है. भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रसकिन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. वीरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “यह शर्मनाक है. भारतीय टीम की विरासत और पहचान हमेशा से ब्लू रही है. मैंने कई सालों तक गर्व के साथ नीली जर्सी पहनी है. प्रशंसक भारतीय टीम को ब्लू में देखना चाहते हैं. केसरिया का क्या तर्क है.”
कांग्रेस विधायक और हॉकी टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह ने भी इस फैसले की आलोचना की है. परगट सिंह ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि इसके बजाय खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि इससे देश को क्या हासिल होगा. उन्होंने मांग की कि खेलों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए.
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने इस फैसले का बचाव किया है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इस बदलाव का सुझाव खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ की ओर से ही आया था क्योंकि हॉकी के नीले मैदान पर नीली जर्सी पहनने से विजिबिलिटी प्रभावित होती थी. उन्होंने बताया कि टीम ने दो रंगों- पीले और केसरिया का सुझाव दिया था और इनमें से केसरिया रंग चुना गया क्योंकि यह राष्ट्रीय झंडे में भी है.
केन्या में टमाटर खाने के बाद 15 हाथियों की संदिग्ध मौत
दक्षिणी केन्या में बीते एक महीने के दौरान 15 हाथियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. वन्यजीव अधिकारियों ने बुधवार, 30 जुलाई को स्थानीय मीडिया को यह जानकारी दी. आशंका जताई जा रही है कि हाथियों की मौत साइनाइड से दूषित टमाटर खाने से हुई है. यह मामला एंबोसेली नेशनल पार्क के आसपास के खेतों से जुड़ा है. पार्क का यह सीमावर्ती इलाका खेती और पशुपालन के लिए जाना जाता है. अधिकारियों ने टमाटरों में जहर मिलाने के मामले में फिलहाल किसी को संदिग्ध नहीं ठहराया है. हालांकि, अतीत में किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए हाथियों को जहर देते रहे हैं.
केन्या वाइल्डलाइफ सर्विस के महानिदेशक इरास्टस कांगा ने बताया कि शुरुआती लैब जांच में साइनाइड पाया गया है. उन्होंने कहा कि साइनाइड एक बेहद जहरीला रसायन है जो विशेष रूप से हाथियों के लिए घातक है. वन्यजीव सेवा ने चेतावनी दी है कि इस दूषित पदार्थ के व्यापक दुष्परिणाम हो सकते हैं. इसका कारण यह है कि उस इलाके में स्थानीय लोगों के मवेशी भी चरते हैं. इरास्टस कांगा के अनुसार वहां गाय और बकरियां भी मौजूद हैं.
वन्यजीव अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मृत हाथियों में पाए गए जहरीले तत्वों से मानव स्वास्थ्य को कोई तात्कालिक खतरा नहीं है. अधिकारी मामले की विस्तृत जांच में जुटे हुए हैं.
फ्रांस और स्पेन के बाद, ग्रीस और तुर्की में फैली जंगल की आग
ग्रीस के क्रीट द्वीप में जंगल की आग तेजी से फैल रही है. आग के फैलने के चलते एक टूरिस्ट रिजॉर्ट से बुधवार, 29 जुलाई को देर रात लगभग आठ हजार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. हालांकि, बाद में हवा की दिशा बदलने से खतरा थोड़ा टल गया. रेथिम्नो क्षेत्र की उप-राज्यपाल मारिया लियोनी ने बताया कि आग से कई घर, कृषि संपत्तियां और मवेशी जलकर खाक हो गए हैं.
फ्रांस में पहली बार दिखा आग का बादल आखिर है क्या?
इस भीषण आग की चपेट में आने से फायर ब्रिगेड के दो कर्मचारियों की मौत हो गई. हवा की दिशा बदलने के कारण दोनों क्रिया व्रिसी गांव के पास एक पहाड़ी रास्ते पर फंस गए थे. इसके अलावा, पेलोपोनीज प्रायद्वीप में एक अन्य जगह पर आग बुझाते समय एक तीसरे कर्मचारी की मौत हो गई. रेथिम्नो इलाके में 200 से अधिक दमकलकर्मी और 53 दमकलें तैनात की गई हैं.
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, आग का दायरा 15 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है. तटीय रक्षक बल की नावें लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए मुस्तैद हैं. ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस ने मृत दमकलकर्मियों को श्रद्धांजलि दी है. ग्रीस में हर साल गर्मियों में सूखे, उच्च तापमान और तेज हवाओं के कारण जंगलों में आग लगने की गंभीर घटनाएं सामने आती हैं.
जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन
ग्रीस के पड़ोसी देश तुर्की में भी जंगलों की आग फैल रही है. तुर्की के कृषि मंत्री के अनुसार, देश भर में कम से कम 115 जगहों पर आग लगी हुई थी, हालांकि उनमें से कम से कम 110 आग पर काबू पा लिया गया है.
इटली की जेलों में भीड़ बढ़ी, घर से सजा काटेंगे ड्रग्स और शराब की लत से जूझ रहे कैदी
इटली की संसद ने बुधवार, 29 जुलाई को एक नया कानून पारित किया है. इसके तहत ड्रग्स या शराब की लत से जूझ रहे हजारों कैदियों को घर पर सजा काटने की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, इसके लिए उन्हें पुनर्वास (रिहैब) कार्यक्रमों से गुजरना होगा. इस कानून का मुख्य उद्देश्य देश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों की समस्या को कम करना है. बंदियों के अधिकार समूह 'एंटीगोन' के अनुसार, इटली की जेलें फिलहाल लगभग 140 प्रतिशत क्षमता पर चल रही हैं. फ्रांस के साथ यह यूरोपीय संघ में सबसे खराब स्थिति मानी जाती है.
इटली के न्याय मंत्री कार्लो नोर्दियो के मुताबिक, देश के लगभग 65 हजार कैदियों में से 10 हजार से अधिक लत से जूझ रहे कैदियों को इसका लाभ मिल सकता है. संसदीय दस्तावेज के अनुसार, शराब की समस्या से जूझ रहे 3,700 अन्य कैदी भी इस योजना के दायरे में आ सकते हैं. हालांकि, एंटीगोन समूह ने इन आंकड़ों पर संदेह जताया है. समूह का कहना है कि कानून में दिया गया बजट केवल 600 से कम रिहैब सीटों के लिए ही पर्याप्त होगा.
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस विधेयक को "कई मोर्चों पर जीत" बताया है. उनकी सरकार ने पिछले साल 15 हजार अतिरिक्त जेल सीटें बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई नई क्षमता नहीं जोड़ी गई है. अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए मेलोनी के लिए यह सुधार राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है.
पैलेट गन से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का इलाज सुनिश्चित करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 30 जुलाई को दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर पैलेट गन के छर्रों से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का इलाज सुनिश्चित किया जाए. कानूनी खबरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक यशोवर्धन आजाद की याचिका में 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा उठाया गया और घायलों के लिए मुआवजे एवं उचित इलाज की मांग की गई.
उन्होंने अपनी याचिका में यह मांग भी की कि आम नागरिकों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूरा या आंशिक प्रतिबंध लगाया जाए. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि पुलिस के नियम, विशेष परिस्थितियों में पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं और उन नियमों के बदले जाने तक, इन हथियारों के इस्तेमाल को अवैध करार नहीं दिया जा सकता.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि ऐसे नियम सार्वजनिक रूप से आसानी से नहीं मिलते हैं. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार को इन नियमों को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया जाए ताकि याचिकाकर्ता अपनी याचिका में संशोधन कर सकें. ग्रोवर ने यह अनुरोध भी किया कि घटना से संबंधित गोला-बारूद के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी अंतरिम आदेश दिया जाए. इस पर सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "जांच के लिए जो भी जरूरी होगा, उसे सुरक्षित रखा जाएगा."
पांच हजार रोहिंग्याओं को वापस लेने पर राजी हुआ म्यांमार: मलेशिया
मलेशिया सरकार ने बुधवार, 30 जुलाई को कहा कि म्यांमार पांच हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने पर सहमत हो गया है. मलेशिया में 2.15 लाख से ज्यादा शरणार्थी या शरण चाहने वाले लोग रहते हैं. ये लोग संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी में भी पंजीकृत हैं. इनमें रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या 1.25 लाख से अधिक है, जिससे वे मलेशिया का सबसे बड़ा शरणार्थी समुदाय बन गए हैं.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा, “लोग पूछते हैं कि हम उन्हें वापस क्यों नहीं भेज देते. उन्हें कहां भेजें. म्यांमार पहले उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर चुका है.” उन्होंने आगे कहा, “अब म्यांमार के साथ हमारे अच्छे रिश्तों की वजह से वे मलेशिया से पांच हजार (रोहिंग्याओं) को वापस लेने पर सहमत हो गए हैं.”
म्यांमार द्वारा रोहिंग्याओं को वापस लिए जाने का यह दुर्लभ मामला हो सकता है. रोहिंग्याओं की एक बड़ी आबादी को साल 2017 में म्यांमार सेना की क्रूर कार्रवाई के चलते देश छोड़कर भागना पड़ा था. इस कार्रवाई में रोहिंग्याओं के गांवों को जला दिया गया और आम नागरिकों की हत्या कर दी गई. म्यांमार से भागे रोहिंग्या अस्थायी तौर पर बांग्लादेश और मलेशिया जैसे देशों में रह रहे हैं.
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