न्याय के साथ न्यायप्रिय दिखना भी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट की उत्तराखंड हाईकोर्ट को नसीहत
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की सुनवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि न्याय केवल होना ही पर्याप्त नहीं, न्याय होते हुए दिखना भी जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक शिष्टाचार और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर जोर दिया.

सौजन्य से:- amarujala.com
उत्तराखंड: हाईकोर्ट के न्यायाधीश की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई आपत्ति, कहा- न्याय होता हुआ दिखना भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश द्वारा प्रतीक रिसॉर्ट्स मामले में दिए गए अंतरिम आदेशों पर नाराजगी जताई और न्यायिक शिष्टाचार एवं निष्पक्षता के सिद्धांतों का पालन करने की बात कही।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश द्वारा प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े मामले में पारित अंतरिम आदेशों पर गंभीर टिप्पणी करते हुए न्यायिक औचित्य और निष्पक्षता के सिद्धांतों पर जोर दिया है।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि संबंधित न्यायाधीश पूर्व में इसी कंपनी की ओर से एक पुराने वाद में अधिवक्ता के रूप में पेश हो चुके थे और वर्तमान विवाद भी उसी भूमि से संबंधित है। ऐसे में उन्हें इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए था। शीर्ष अदालत ने कहा कि न्याय केवल किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय होते हुए दिखाई भी देना चाहिए। किसी पूर्व मुवक्किल से जुड़े मामले में पक्ष या विपक्ष में आदेश पारित करना न्यायिक निष्पक्षता की कसौटी पर उचित नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन मूल याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी, वे अलग-अलग मुद्दों से संबंधित थीं, लेकिन अंतरिम आदेशों के माध्यम से मामले का दायरा काफी बढ़ा दिया गया। अदालत ने माना कि ऐसा संभवतः सद्भावना से किया गया हो, लेकिन असंबंधित याचिकाओं में इस प्रकार का विस्तार न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। पीठ ने सुझाव दिया कि यदि न्यायाधीश को यह मामला व्यापक जनहित का प्रतीत होता था, तो उसे हाईकोर्ट की जनहित याचिका समिति के समक्ष भेजा जा सकता था अथवा आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित किया जा सकता था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह देखते हुए कि पेड़ों की कटाई पर रोक सहित हाईकोर्ट के कुछ अंतरिम आदेश और आश्वासन पहले से प्रभावी हैं, फिलहाल उन आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले के सभी कानूनी पहलुओं पर निर्णय संबंधित सक्षम पीठ करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि आपराधिक याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके तथा आवश्यकता होने पर जनहित याचिका प्रारंभ करने के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सके।
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