निजी क्षेत्र को बिजली व्यापार करने से नहीं रोक सकते हैं मौजूदा कानून: प्रबल अधिकारी
ऊर्जा विशेषज्ञ और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उप-कार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी ने दावा किया है कि निजी क्षेत्र को बिजली व्यापार में प्रवेश कराने के लिए मौजूदा कानून में ही कानूनी आधार मौजूद है।

सौजन्य से:- Ratopati
काठमांडू। मौजूदा विद्युत अधिनियम, 2049 निजी क्षेत्र को बिजली व्यापार करने से नहीं रोकता है, यह बात ऊर्जा विशेषज्ञ और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व उप-कार्यकारी निदेशक प्रबल अधिकारी ने कही है। स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों की संस्था नेपाल (इप्पान) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि निजी क्षेत्र को बिजली व्यापार में प्रवेश कराने के लिए मौजूदा कानून में ही कानूनी आधार मौजूद है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्युत अधिनियम, 2049 की धारा 21 और 22 ने निजी क्षेत्र को बिजली व्यापार में भाग लेने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। उनका कहना है कि हालांकि अधिनियम में 'बिजली व्यापार' शब्द स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं है, लेकिन इसमें खरीद, बिक्री, आयात और निर्यात के विषय शामिल होने के कारण यह बहुपक्षीय खरीदार (मल्टीपल बायर) मॉडल की कल्पना कर चुका है। उन्होंने तर्क प्रस्तुत किया कि धारा 21 में उत्पादित बिजली की बिक्री और धारा 22 में आयात-निर्यात की व्यवस्था होने के कारण नेपाल विद्युत प्राधिकरण को ही एकमात्र खरीदार होने वाले मॉडल तक सीमित रहने की आवश्यकता नहीं है।
अधिकारी ने कानून की उदार व्याख्या पर जोर देते हुए कहा- ‘विद्युत अधिनियम, 2049 की धारा 21 में उत्पादित बिजली की बिक्री के संबंध में व्यवस्था की गई है जबकि धारा 22 में बिजली के आयात-निर्यात के संबंध में व्यवस्था की गई है। भले ही बिजली व्यापार शब्द का प्रयोग न किया गया हो, लेकिन खरीद, बिक्री, आयात और निर्यात कहा गया है। यदि हम धारा 21 और 22 दोनों को एक साथ मिलाकर देखें, तो अधिनियम ने मल्टीपल बायर की कल्पना कर ली है।’
पिछले सरकारी निर्णयों का उदाहरण देते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘शब्द की संकीर्ण परिभाषा में रहकर पावर ट्रेडिंग कंपनियों को लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है, यह समझना और समझाना नहीं चाहिए। इसी कानून के आधार पर वर्ष 2073 में नेपाल सरकार ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण की 51 प्रतिशत शेयर वाली कंपनी को पहला बिजली व्यापार लाइसेंस प्रदान कर दिया है। कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत एक संस्था को इसी कानून के आधार पर लाइसेंस दिया जा सकता है, तो अन्य को न देने का कोई औचित्य नहीं है।’
सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी को उसी कानून के आधार पर अनुमति दिए जाने के कारण निजी क्षेत्र की कंपनियों को रोका नहीं जा सकता है, यह उनका कहना है। उन्होंने बताया कि नेपाल में बिजली का उत्पादन बढ़ने के साथ ही उत्पादित बिजली के बाजार प्रबंधन, खरीद-बिक्री और आयात-निर्यात में निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक है और इससे प्राधिकरण को भी सहायता मिलेगी। अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि कानून की संकुचित व्याख्या को छोड़कर इसकी मूल भावना और पिछले अभ्यास के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
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