सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत बरकरार रखी, चुनाव में भागीदारी की गारंटी
सुप्रीम कोर्ट ने नंदिग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को मिली अंतरिम जमानत को छेड़ने से इनकार कर दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि इसका उद्देश्य उन्हें चुनाव लड़ने और मतगणना में भाग लेने का अवसर देना है। जमानत 20 अक्टूबर तक वैध रहेगी और प्रधान को 21 अक्टूबर को सरेंडर करना होगा; भविष्य में जमानत बढ़ाने की कोई भी मांग राज्य सरकार के प्रस्तुत दलीलों के आधार पर विचार की जाएगी।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार की अंतरिम ज़मानत में दखल देने से किया इनकार
Shahadat
7 Oct 2026 7:33 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव लड़ रहे कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को मिली अंतरिम ज़मानत बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि इस राहत का मकसद उन्हें चुनाव लड़ने और वोटों की गिनती में शामिल होने का मौका देना है।
प्रधान को 18 सितंबर, 2026 को 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े 19 साल पुराने आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें हाईकोर्ट के 29 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने प्रधान को 21 अक्टूबर तक अंतरिम ज़मानत दी थी। उपचुनाव के लिए वोटिंग 6 अक्टूबर को हुई थी, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होनी है।
कोर्ट ने कहा कि भले ही प्रधान के खिलाफ दर्ज मामलों में गंभीर अपराधों के आरोप शामिल हों, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना था कि उन्हें चुनाव लड़ने का मौका न गंवाना पड़े।
कोर्ट ने कहा,
"भले ही प्रतिवादी के खिलाफ दर्ज मामलों की सूची में कुछ गंभीर अपराधों का ज़िक्र हो, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का मकसद प्रतिवादी को चुनाव लड़ने और वोटों की गिनती में शामिल होने में सक्षम बनाना है।"
इस तरह कोर्ट ने माना कि अंतरिम ज़मानत में दखल देने की कोई ज़रूरत नहीं है।
यह ज़मानत 20 अक्टूबर तक लागू रहेगी और प्रधान को 21 अक्टूबर को सरेंडर करने का निर्देश दिया गया। कोर्ट ने साफ किया कि अगर प्रधान बाद में अंतरिम ज़मानत बढ़ाने या रेगुलर ज़मानत की मांग करते हैं तो राज्य सरकार अपनी सभी दलीलें पेश कर सकती है।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"ऐसे हालात में हमें आदेश में दखल देने की ज़रूरत नहीं लगती। हालांकि, अगर प्रतिवादी अंतरिम ज़मानत बढ़ाने या रेगुलर ज़मानत के लिए अर्ज़ी देता है तो हमारे सामने रखी गई सभी दलीलें राज्य सरकार के लिए उपलब्ध होंगी और हाई कोर्ट कानून के मुताबिक उन पर विचार करेगा।"
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने मामले की मेरिट (गुण-दोष) पर कोई राय नहीं दी।
Case Title : State of West Bengal v. Milan Pradhan
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