एनसीबी की दो यूनिटों में तालमेल की कमी पर न्यायालय ने नाराज़गी जताई
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की दिल्ली और चंडीगढ़ यूनिटों के बीच सहयोग की कमी के कारण विशेष न्यायाधीश संदीप यादव ने अदालत में लापरवाही को गंभीर चूक घोषित किया। 2015 के एक पार्सल में मिले 560 ग्राम चरस के मामले में दिल्ली यूनिट ने चंडीगढ़ यूनिट से मोबाइल रिकॉर्ड और पते के सत्यापन हेतु दस्तावेज मांगे, पर कोई जवाब नहीं मिला। अदालत ने अधिकारियों के बीच आपसी सहयोग के अभाव को बेहद चिंताजनक बताया।

सौजन्य से:- Hindustan
एनसीबी की दो यूनिट में तालमेल के अभाव पर अदालत नाराज
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की दो अलग-अलग यूनिटों के बीच आपसी सहयोग की कमी के मद्देनजर अदालत ने नाराजगी जताई। 2015 में एक पार्सल में चरस मिलने के मामले में जांच में लापरवाही को गंभीर चूक कहा गया। चंडीगढ़ यूनिट ने मोबाइल रिकॉर्ड और पते के सत्यापन के लिए भेजे पत्रों का जवाब नहीं दिया।
- मांगने के बावजूद चंडीगढ़ यूनिट ने नहीं दिए पते और मोबाइल रिकॉर्ड नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। मादक पदार्थों की तस्करी के एक गंभीर मामले की जांच के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की दो अलग-अलग यूनिटों के बीच आपसी सहयोग की कमी पर अदालत ने नाराजगी जताई। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश संदीप यादव की अदालत ने जांच में हुई लापरवाही को गंभीर चूक करार दिया। अदालत ने कहा, अधिकारियों का आपस में सहयोग न करना बेहद चिंताजनक है।
मामले की पृष्ठभूमि
मामला नवंबर 2015 का है। जब एनसीबी को दिल्ली स्थित एक कूरियर सेवा सुविधा (डीएचएल) में रखे पार्सल में नशीले पदार्थ होने की गुप्त सूचना मिली थी। पार्सल को खोलने पर उसमें से एक काली किताब बरामद हुई, जिसके कवर में करीब 560 ग्राम चरस थी। यह पार्सल ब्रिटेन भेजा जा रहा था। मामले की जांच के बाद फिलीपींस की नागरिक निम्फा डी जीसस को गिरफ्तार किया गया था।
चंडीगढ़ यूनिट ने नहीं दिया जवाब
सुनवाई के दौरान सामने आया कि एनसीबी की दिल्ली जोनल यूनिट ने चंडीगढ़ जोनल यूनिट को दिसंबर 2015 और नवंबर 2016 में पत्र लिखकर आरोपी से जुड़े मोबाइल नंबर का कॉल डिटेल रिकॉर्ड, कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म और पते का भौतिक सत्यापन करने के लिए कहा था। हालांकि, चंडीगढ़ यूनिट की ओर से इन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला।
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