सुप्रीम कोर्ट ने मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत में दखल नहीं किया, राज्य को हाईकोर्ट में दलील पेश करने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत को बरकरार रखने का निर्णय किया और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को यह अधिकार दिया कि यदि प्रधान 20 अक्टूबर के बाद जमानत में विस्तार या नियमित जमानत की मांग करता है, तो वह हाईकोर्ट के सामने अपने सबूत रख सके।

सौजन्य से:- Aaj Tak
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव उम्मीदवार मिलन प्रधान से जुड़े मामले में सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम जमानत के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को यह छूट दी कि अगर मिलन प्रधान लंबित आपराधिक मामलों में अंतरिम जमानत बढ़ाने या नियमित जमानत की मांग करते हैं, तो राज्य सरकार हाईकोर्ट के सामने अपनी दलीलें रख सकती है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है, ताकि वह चुनाव प्रचार कर सकें और मतगणना में हिस्सा ले सकें. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को हुआ था.
2007 के छह आपराधिक मामलों में मिली थी जमानत
बता दें कि मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी. पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. 30 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करने की सहमति जताई थी.
बुधवार की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मिलन प्रधान के खिलाफ लगे आरोपों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर आपत्ति जताई.
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'घर में आग लगाने और बम लगाने का आरोप'
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मिलन प्रधान पर गंभीर आरोप हैं. उनके मुताबिक, आरोपी पर पीड़ित के घर में आग लगाने और वहां बम लगाने जैसे आरोप हैं. उन्होंने कहा कि इन मामलों में 2007-08 में गैर-जमानती वारंट यानी NBW भी जारी हुए थे.
राज्य सरकार ने सवाल उठाया कि अगर इतने गंभीर मामले लंबित थे तो अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई. तुषार मेहता ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान भी FIR दर्ज थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकार और पुलिस अधिकारियों ने मिलन प्रधान को संरक्षण दिया.
'नामांकन के दौरान सामने आई लंबित मामलों की जानकारी'
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मौजूदा सरकार को लंबित मामलों की जानकारी तब मिली, जब मिलन प्रधान ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया और अपने खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी चुनावी दस्तावेजों में दी.
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप और पूरे घटनाक्रम से जनता के बीच गलत संदेश जा सकता है. उन्होंने आशंका जताई कि इससे राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा मिलने का संदेश जा सकता है.
CJI ने नंदीग्राम हिंसा का किया जिक्र
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नंदीग्राम में हुई हिंसा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नंदीग्राम की हिंसा के गंभीर और विनाशकारी परिणाम हुए थे.
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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम जमानत के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है. हालांकि, अगर मिलन प्रधान 20 अक्टूबर के बाद अंतरिम जमानत बढ़ाने या उसे नियमित जमानत में बदलने के लिए हाईकोर्ट का रुख करते हैं, तो हाईकोर्ट राज्य सरकार की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर विचार करेगा.
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