मायावती का बड़ा बयान: सड़क पर नहीं, अदालत में जाएं दलितों का न्याय
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन पर बोले कि पीड़ित परिवारों को सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए।

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने मेरठ की ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है. मायावती ने दलित समाज से कानून हाथ में न लेने की अपील की और कहा कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई कानून के दायरे में रहकर ही लड़नी चाहिए.
उनके बयान को चंद्रशेखर आजाद पर हमला माना जा रहा है. यह बयान ऐसे समय आया जब मेरठ में इस मामले के प्रदर्शन में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया और तीस से ज्यादा लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.
मायावती ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की सीख है कि अत्याचार के खिलाफ लड़ाई कानून हाथ में लेकर नहीं बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़नी चाहिए. अगर मामला अदालत में जाए और निचली अदालत से इंसाफ न मिले तो ऊपरी अदालत का रास्ता अपनाना चाहिए क्योंकि संविधान में इसकी पूरी व्यवस्था है, इसलिए सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं.
मायावती ने कहा कि कुछ संगठन राजनीति चमकाने के लिए पीड़ित परिवारों को भड़काकर सड़कों पर उतार देते हैं जिससे हिंसा और सड़क जाम जैसी घटनाएं होती हैं और बाद में उनके नेता घटनास्थल पर पहुंचकर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं जिससे पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता बल्कि मुश्किलें बढ़ती हैं. मायावती ने दलित समाज से अपनी वोट की ताकत समझने और चाबी अपने पास रखने की अपील की.
Advertisement
यह भी पढ़ें: मेरठ में SSP ने प्रदर्शनकारियों पर क्यों बरसाए थप्पड़? बताई बवाल की पूरी कहानी; रवि गौतम समेत 8 आरोपी भेजे गए जेल
गौरतलब है कि मेरठ में बुधवार को कमिश्नर चौराहे पर ललिता गौतम की हत्या को लेकर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करने पहुंचे थे. बीस साल की ललिता गौतम टीपी नगर इलाके से 15 मई को लापता हुई थीं और 17 मई को उनका शव रोहटा इलाके में मिला था.
मुख्य आरोपी को अठारह मई को गिरफ्तार किया गया जबकि सबूत मिटाने के आरोप में एक और आरोपी बाद में पकड़ा गया. कुछ लोगों ने परिवार को भड़काकर ज्ञापन के बहाने कलेक्ट्रेट के बाहर धरना करवाया, जिसके बाद बुधवार रात सात लोगों को गिरफ्तार किया गया और छह नामजद और पच्चीस से ज्यादा अज्ञात लोगों पर गैरकानूनी जमावड़ा व रास्ता जाम के आरोप में मामला दर्ज हुआ.
प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति सड़क जाम कर डीएम कार्यालय का गेट तोड़ा और पुलिस पर हमला किया, जिसमें ग्यारह पुलिसकर्मी घायल हुए. करीब छह घंटे चले इस जाम से लोगों को परेशानी हुई और दो एंबुलेंस भी फंस गईं. पुलिस के मुताबिक सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाकर जातीय नफरत भड़काने की कोशिश भी हुई.
---- समाप्त ----
TOPICS:
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
टीएमसी के खातों में 160 करोड़ की लॉन्ड्रिंग? बागी गुट सुप्रीम कोर्ट जा रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की अवैध इमारतों पर सख्ती से दखल दिया

बाल विवाह की दहलीज पर बिहार के कानून : हाईकोर्ट में अब सुस्त जवाबदेही, कोई कार्रवाई नहीं, बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग

पिता-भाई की हत्या के दोषी सुमित उर्फ बबलू को उम्रकैद की सजा

रिफंड दावों को खारिज करने वाले कमी ज्ञापन पर संशोधित कानूनी स्थिति के आलोक में पुनर्विचार:

सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण की रिपोर्ट न करने के मामले में प्रधानाध्यापिका के खिलाफ मामला बहाल किया

राम मंदिर चढ़ावा मामला : सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई

ओरांव आदिवासी समुदाय की विरासत पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
ताज़ा ख़बरें
- महुआ मोइत्रा को हेनरी से मिलने के लिए इंतजार करना होगा, जानें क्या है पूरा मामला
- नाबालिग पर यौन उत्पीड़न: सुप्रीम कोर्ट ने कहा रिपोर्ट करना कानूनन बाध्य है
- एसएफआईओ अभियोजन में पूर्व-संज्ञान सुनवाई के अधिकार: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का निर्णय
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी का लिखित आधार आवश्यक नहीं
- बाल यौन शोषण की रिपोर्ट न करना कानूनी कार्रवाई को बुलावा देता है
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बच्चे की शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए
- भारत में एआई विनियमन के लिए बदलाव का संकेत, सरकारी अधिकारियों और अदालतों द्वारा नियामक संकेत
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार: ट्रायल में देरी पर पंजाब और महाराष्ट्र सरकार को झिड़का

