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महुआ मोइत्रा को हेनरी से मिलने के लिए इंतजार करना होगा, जानें क्या है पूरा मामला

महुआ मोइत्रा और जय अनंत देहाद्रई के बीच कुत्ते हेनरी की कस्टडी को लेकर विवाद चल रहा है, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला टाल दिया है। महुआ मोइत्रा का दावा है कि हेनरी उन्हें उपहार के रूप में मिला था और लंबे समय तक उनके साथ रहा।

10 जुलाई 2026 को 02:58 am बजे
महुआ मोइत्रा को हेनरी से मिलने के लिए इंतजार करना होगा, जानें क्या है पूरा मामला

सौजन्य से:- Navbharat Times

हजारों करोड़ की 'सिंधिया विरासत' और तीन पीढ़ियों की 'कानूनी जंग' पर समझौते के संकेत, जानिए क्या है लीगल फैक्टरदरअसल, यह विवाद केवल एक पालतू पशु की अभिरक्षा का तो है ही, बल्कि भारतीय कानून में पालतू पशुओं की कानूनी स्थिति, भावनात्मक संबंधों और साझा अभिरक्षा जैसे सवालों को भी सामने लाता है। बुधवार 8 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला अगले सप्ताह तक टाल दिया है।

कुत्ते को लेकर महुआ मोइत्रा और जय अनंत देहाद्रई के बीच का विवाद

मामले में महुआ मोइत्रा का दावा किया है कि हेनरी उन्हें उपहार के रूप में मिला था और वह लंबे समय तक उनके साथ उनके साथ पर रहा। उनका कहना है कि दोनों के बीच मौखिक समझौता था कि हेनरी की साझा देखभाल होगी। इसी आधार पर उन्होंने जिला अदालत में साझा अभिरक्षा लागू कराने की मांग की थी। हालांकि निचली अदालत ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। दूसरी ओर महुआ के पूर्व मित्र जय अनंत देहाद्रई ने स्वयं भी जिला अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उनकी ओर से महुआ की मूल वाद खारिज करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी। इस प्रकार दोनों पक्ष अलग-अलग अपीलों के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचे हैं।दिल्ली हाईकोर्ट में 'हेनरी' पर सुनवाई और महुआ मोइत्रा का इंतजार

- दिल्ली हाईकोर्ट में 8 जुलाई को हुई मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उन्होंने जय अनंत देहाद्रई के वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सिवल बिलिमोरिया से पूछा कि क्या महुआ मोइत्रा को हेनरी से मिलने की अनुमति दी जा सकती है।

- इस पर देहाद्रई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सिवल बिलिमोरिया ने कहा कि ऐसा करना कुत्ते के हित में नहीं होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें धमकाने की कोशिश की गई थी, इसलिए विजिटेशन उचित नहीं है।

- फिर महुआ मोइत्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्येल त्रेहान ने भी अदालत को बताया कि इस मामले से जुड़ी शिकायत पहले ही वापस ली जा चुकी है। इस पर कोर्ट ने देहाद्राई के वकील से पूछा कि क्या वह किसी आपसी सहमति से किसी व्यवस्था के लिए तैयार हैं।

- अदालत ने तत्काल कोई आदेश पारित करने के बजाय कहा कि वह दोनों पक्षों को संक्षिप्त सुनवाई का अवसर देकर अगले सप्ताह इस मुद्दे पर निर्णय करेगी। इस दौरान अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल विजिटेशन के प्रश्न पर विचार किया जाएगा, अंतिम कस्टडी विवाद अलग मुद्दा है।

पालतू पशुओं की कस्टडी पर भारतीय कानून क्या कहता है?

देखा जाए तो, भारत में अभी तक पालतू पशुओं की संयुक्त अभिरक्षा या को-पैरेंटिंग को लेकर कोई साफ कानूनी नजरिया मौजूद नहीं है। आम तौर पर ऐसे विवाद संपत्ति संबंधी अधिकारों और सिविल कानून के सिद्धांतों के आधार पर तय होते हैं। इसी विवाद में जिला अदालत ने कहा था कि भारतीय कानून में किसी व्यक्ति को कुत्ते का माता-पिता मानने की अवधारणा मान्य नहीं है। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष महुआ मोइत्रा ने भावनात्मक जुड़ाव और लंबे समय तक देखभाल को प्रमुख आधार बनाया है।बड़ी देर कर दी जनाब आपने, FIR में 23 साल की देरी स्वीकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द हाईकोर्ट का फैसला

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